जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जयकुमार पिल्लई की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अमिताभ उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। अदालत ने नगर निगम को तीन सप्ताह के भीतर कचरा वाहनों के शोर को निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
हर थाने में ध्वनि मापक यंत्र अनिवार्य
हाईकोर्ट ने इंदौर पुलिस प्रशासन को शहर के प्रत्येक पुलिस थाने में ध्वनि मापक उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित थानों के संपर्क नंबर समाचार पत्रों और इंदौर पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने को भी कहा, ताकि नागरिक ध्वनि प्रदूषण की शिकायत आसानी से दर्ज करा सकें।
सुनवाई के दौरान खजराना क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त आशीष पटेल ध्वनि मापक उपकरण लेकर अदालत में उपस्थित हुए। हालांकि, अदालत को बताया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर शोर मापने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए अब तक इस उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि उपकरण उपलब्ध होने का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब पुलिसकर्मी शिकायत मिलने पर उनका इस्तेमाल करें और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
साइलेंस जोन की पूरी सूची प्रकाशित करने का आदेश
अदालत ने साइलेंस जोन की सूची प्रकाशित करने संबंधी अपने पूर्व आदेश का पूरी तरह पालन नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। पीठ ने 24 सितंबर को व्यापक प्रसार वाले दैनिक समाचार पत्रों में साइलेंस जोन की पूरी सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान शासन की ओर से समाचार पत्रों में प्रकाशित सामग्री के कुछ अंश ही प्रस्तुत किए गए।
हाईकोर्ट ने इसे पूर्व आदेश का उचित अनुपालन नहीं माना और पूरी सूची प्रकाशित करने का निर्देश दोहराया। अदालत ने नागरिकों से ऐसे अन्य संवेदनशील स्थानों के बारे में सुझाव देने को भी कहा, जिन्हें साइलेंस जोन घोषित किया जाना चाहिए। इससे अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण की व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
त्योहारों में तेज आवाज पर जताई चिंता
हाईकोर्ट ने नवरात्र और दशहरा के दौरान शहर में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। अदालत के अनुसार, उत्सवों के दौरान कई स्थानों पर शोर निर्धारित सीमा से अधिक रहा और पुलिस उसके स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सफल नहीं दिखाई दी।
पीठ ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि पुलिस थानों में प्राप्त ध्वनि प्रदूषण संबंधी शिकायतों और पुलिस द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर की गई कार्रवाई का पूरा विवरण अदालत के रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया जाए।
हर वार्ड से दो स्वयंसेवक करेंगे निगरानी
ध्वनि प्रदूषण की निगरानी में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने प्रत्येक थाना प्रभारी को अपने क्षेत्र के हर वार्ड से दो स्वयंसेवक नामित करने का निर्देश दिया है। ये स्वयंसेवक तेज आवाज करने वाले व्यक्तियों और वाहनों की सूचना तत्काल पुलिस को देंगे। जरूरत पड़ने पर वे मोबाइल फोन से वीडियो बनाकर भी साक्ष्य उपलब्ध करा सकेंगे।
अदालत ने माना कि कानूनी प्रक्रिया में उलझने की आशंका के कारण कई नागरिक शोर के खिलाफ शिकायत करने से बचते हैं। स्वयंसेवक पुलिस और जनता के बीच संपर्क सूत्र का काम करेंगे, जिससे शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।
हाईकोर्ट के इन निर्देशों का उद्देश्य शहर में ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और नागरिकों को अनावश्यक शोर से राहत दिलाना है। अब नगर निगम और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से यह तय होगा कि अदालत के आदेशों का जमीन पर कितना प्रभावी पालन हो पाता है।

