तेहरान/रियाद: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। इजराइली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ जारी संघर्ष को खत्म करने और अपने क्षेत्रों पर हमले रोकने के लिए 95 अरब रुपये (लगभग 1.15 अरब डॉलर) देने की पेशकश की है।
सऊदी ने रखी शर्त- पहले कब्जे वाले इलाके लौटाए हूती
इस बातचीत में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किये की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन और ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पजशकिया भी शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब का कहना है कि वह सैन्य दबाव में आकर कोई नया सीजफायर समझौता नहीं करेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब चाहता है कि हूती पहले उन इलाकों को लौटाएं, जिन पर उन्होंने यमन की सरकार से कब्जा किया है। इस सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है।
सऊदी का तेल निर्यात प्रभावित हुआ
हूतियों के हमलों से सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। दूसरी ओर, बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास भी हूतियों के कब्जे की वजह से सऊदी का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है।
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तीन साल पहले भी हुआ था समझौता
इजराइली मीडिया के मुताबिक, सऊदी अरब और हूतियों के बीच विवाद की एक वजह तीन साल पहले हुई सहमति को लागू न करना भी है।
उस समझौते के तहत सऊदी अरब को हूतियों के नियंत्रण वाले इलाकों में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी देने और आम लोगों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं दोबारा बनाने के लिए आर्थिक मदद देनी थी।
इसके बदले हूती विद्रोहियों से सीजफायर बनाए रखने और सऊदी अरब पर हमले रोकने की उम्मीद थी। लेकिन हाल ही में हूतियों ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने पुरानी सहमति का पालन नहीं किया। उन्होंने इसी आधार पर अपने हमलों को सही ठहराया है।

