दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने E20 विवाद पर बयान देते हुए कहा कि, करीब 3 महीने पहले E20 फ्यूल का काफी विरोध हुआ था, लेकिन अब यह विरोध खत्म हो गया है। उन्होंने इसे पैसे देकर चलाया गया अभियान बताया।
गडकरी का ये बयान केंद्र सरकार के 100% एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को मंजूरी देने के एक दिन बाद आया है।
2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं
दरअसल, भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा था। दावा किया गया था कि 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं।
हाईवे की क्वालिटी से समझौता नहीं किया जाएगा
गडकरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर नेशनल हाईवे की खराब हालत की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद 700 से 800 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। हाईवे की क्वालिटी से समझौता नहीं किया जाएगा।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक में एसआईआर से 99.32 लाख नाम घटे, अब 4.55 करोड़ वोटर
कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा
सरकार के मुताबिक, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी, प्रदूषण कम हुआ और किसानों को फायदा मिला। अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में भी एथेनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल होता है।
भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है। 1 अप्रैल से देशभर में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो गई है। अब सरकार का लक्ष्य 2030 तक एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 30% करना है।

