नई दिल्ली: डिजिटल गिरफ्तारी और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने डिजिटल धोखाधड़ी से ग्राहकों को होने वाले नुकसान के मामलों में बैंकों की जवाबदेही पर जोर दिया। वहीं, WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने अब तक 9,400 संदिग्ध खातों को प्रतिबंधित किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केवाईसी नियमों में संशोधन से जुड़े निर्देशों की जांच करने की बात भी कही है। इन निर्देशों को 31 दिसंबर तक लागू किया जाना है। अदालत ने कहा कि ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी होने पर बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखें और समय रहते जरूरी कदम उठाएं।
संदिग्ध लेनदेन की सूचना पुलिस को देने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को ग्राहकों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत बताई। अदालत के अनुसार, असामान्य लेनदेन सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना देने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसमें नजदीकी पुलिस थाने को जानकारी देना भी शामिल है।
डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में रकम अक्सर अलग-अलग बैंक खातों में तेजी से भेज दी जाती है। ऐसे में संदिग्ध लेनदेन की समय पर पहचान और कार्रवाई से पीड़ितों के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। अदालत की टिप्पणियों से बैंकों की निगरानी व्यवस्था और ग्राहकों को राहत देने के उपायों पर ध्यान बढ़ने की उम्मीद है।
WhatsApp ने 9,400 संदिग्ध खाते किए प्रतिबंधित
सुनवाई के दौरान WhatsApp ने अदालत को बताया कि उसने संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े 9,400 खातों को प्रतिबंधित किया है। डिजिटल मंचों पर संदिग्ध खातों की पहचान और उन पर कार्रवाई साइबर धोखाधड़ी रोकने के प्रयासों का अहम हिस्सा है।
हालांकि, ऑनलाइन ठगी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बैंकों, डिजिटल मंचों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय पर साझा करने से धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई तेज हो सकती है।
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क्या है डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर ठगी?
डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर ठगी करने वाले अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताते हैं। वे लोगों को किसी कथित आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देते हैं और वीडियो कॉल पर निगरानी में रहने या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
डर और मानसिक दबाव के कारण कई लोग अपनी जमा-पूंजी ठगों के खातों में भेज देते हैं। जबकि डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर इस तरह धमकाकर पैसे वसूलना साइबर धोखाधड़ी का तरीका है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बीच बैंकों की जवाबदेही, संदिग्ध लेनदेन की निगरानी और डिजिटल ठगी के पीड़ितों को राहत देने के उपाय अहम मुद्दे बने हुए हैं।

