नई दिल्ली: चिकित्सा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। हजारों जिंदगियों को नई जिंदगी देने वाले, जगा-बलिया जैसे चमत्कारी ऑपरेशन को सफल करने वाले देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन डॉ. अशोक कुमार महापात्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। पद्मश्री से सम्मानित डॉ. महापात्र ने सोमवार रात 2 नवंबर 2026 को AIIMS नई दिल्ली में उपचार के दौरान 73 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे देश के डॉक्टर्स और AIIMS परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है।
कौन थे डॉ. महापात्र?
डॉ. अशोक कुमार महापात्र न्यूरोसर्जरी की दुनिया का एक बड़ा नाम थे। उन्होंने कई बड़े पदों पर काम किया।
- AIIMS भुवनेश्वर के संस्थापक निदेशक: उन्होंने ओडिशा में AIIMS भुवनेश्वर को शुरू से खड़ा किया और उसके पहले डायरेक्टर बने।
- AIIMS नई दिल्ली: वो यहां न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख (HOD) रह चुके थे।
- SGPGIMS लखनऊ: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के निदेशक के तौर पर भी उन्होंने सेवाएं दी थीं।
- AIIMS भोपाल: वो AIIMS भोपाल के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके थे।
उन्होंने अपने करियर में हजारों जटिल न्यूरो सर्जरी कीं और कई डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया।
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सबसे बड़ी उपलब्धियां क्या थीं?
1. पद्मश्री सम्मान: चिकित्सा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय और लंबे योगदान के लिए भारत सरकार ने 2024 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
2. जगा-बलिया की ऐतिहासिक सर्जरी: उनकी सबसे चर्चित उपलब्धि 2017 की है। ओडिशा के कंधमाल जिले के जुड़े हुए जुड़वां बच्चे जगा और बलिया जिनका सिर आपस में जुड़ा हुआ था, उनकी जटिल सर्जरी का नेतृत्व डॉ. महापात्र ने ही किया था। AIIMS दिल्ली में 20 से ज्यादा डॉक्टरों की टीम ने करीब 21 घंटे तक चले ऑपरेशन में दोनों बच्चों को अलग किया था। इस सर्जरी ने पूरी दुनिया में भारत का डंका बजा दिया था।

