नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण 5 नवंबर को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल ने निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसकी पुष्टि परीक्षण क्षेत्र में तैनात विभिन्न उपकरणों से मिले आंकड़ों के आधार पर की गई।
यूजर ट्रायल के तहत हुआ परीक्षण
मंत्रालय ने बताया कि यह परीक्षण User Evaluation Trials का हिस्सा था। परीक्षण के दौरान मिसाइल के प्रदर्शन और निर्धारित मानकों का आकलन किया गया। DRDO की टीम ने अलग-अलग तकनीकी उपकरणों के माध्यम से इसके उड़ान संबंधी आंकड़े जुटाए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर DRDO और इससे जुड़े वैज्ञानिकों की सराहना की। उन्होंने इसे देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
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क्या है प्रलय मिसाइल की खासियत?
प्रलय एक स्वदेशी क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इस श्रेणी की मिसाइलें अपने उड़ान पथ में बदलाव करने की क्षमता रखती हैं, जिससे इन्हें पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में अलग पहचान मिलती है। इसका विकास देश की स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। ऐसे परीक्षणों से मिसाइल की तकनीकी क्षमता, विश्वसनीयता और संचालन से जुड़े पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है।
भारत लगातार रक्षा उपकरणों के स्वदेशी विकास पर जोर दे रहा है। प्रलय का सफल परीक्षण इसी प्रयास का हिस्सा है और इससे देश की रक्षा अनुसंधान क्षमता को भी मजबूती मिलती है।

