वेलिंगटन: न्यूजीलैंड में आज आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के सामने सत्ता में वापसी की चुनौती है। चुनाव में उनकी नेशनल पार्टी का मुकाबला विपक्षी लेबर पार्टी से है। चुनाव से पहले आए सर्वे में नेशनल पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और कमजोर अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।
न्यूजीलैंड की संसद में कुल 120 सीटें
न्यूजीलैंड की संसद में कुल 120 सीटें हैं, जबकि सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। दोनों प्रमुख दलों को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना कम बताई जा रही है।
ऐसे में छोटी पार्टियों की भूमिका अहम हो सकती है। चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन सत्ता बरकरार रख पाएंगे या न्यूजीलैंड में नई सरकार बनेगी।
कौन है प्रधानमंत्री पद का दावेदार
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन दूसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 2023 के चुनाव में सेंटर-राइट नेशनल पार्टी को जीत दिलाई थी। इससे देश में 6 साल से चल रही लेबर पार्टी की सरकार खत्म हो गई थी। हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उन्हें राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस साल अप्रैल और अगस्त में उनकी अपनी पार्टी के सांसदों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए और उन्हें हटाने की कोशिश की।
दोनों बार लक्सन अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे। अगस्त में हुई दूसरी कोशिश के पीछे उस समय के रक्षा मंत्री का हाथ होने की खबरें भी आई थीं।
उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था में धीमी सुधार और गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच मतभेदों को लेकर भी आलोचना झेलनी पड़ी है।
ये भी पढ़ें: अभिषेक बनर्जी का आरोप- घर पर हथियार लेकर पहुंचे हमलावर, पत्थरबाजी की; 5 महीने में तीसरी बार हमले का दावा
क्रिस हिपकिंस फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं
विपक्षी लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। 2023 के चुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। हिपकिंस पहली बार 2008 में सांसद बने थे। जनवरी 2023 में जैसिंडा अर्डर्न के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी।
हालांकि, उनका कार्यकाल सिर्फ नौ महीने चला। अक्टूबर 2023 के चुनाव में लक्सन की नेशनल पार्टी के गठबंधन ने जीत हासिल की और लेबर पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।
हार के बाद भी हिपकिंस पार्टी के नेता बने रहे। इस बार वे महंगाई से राहत देने और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने का वादा कर रहे हैं।

