Sunday, November 8, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsआडवाणी के 99वें जन्मदिन पर PM मोदी ने लिखा लेख, अटल जी...

आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर PM मोदी ने लिखा लेख, अटल जी संग रिश्ते किए याद

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी रविवार, 8 नवंबर को 99 वर्ष के हो गए। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए एक विशेष लेख लिखा। इसमें उन्होंने आडवाणी के संघर्षपूर्ण जीवन, राजनीतिक सफर, संगठन निर्माण और देश की राजनीति में उनके योगदान को याद किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में कहा कि बहुत कम ऐसे व्यक्तित्व होते हैं, जिनके जीवन में आधुनिक भारत के इतिहास के इतने महत्वपूर्ण अध्याय जुड़े हों। आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को सिंध (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान उन्हें अपना घर और परिचित माहौल छोड़कर भारत आना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और नए सिरे से जीवन की शुरुआत की।

जनसंघ से भाजपा के निर्माण तक निभाई अहम भूमिका

पीएम मोदी ने लिखा कि आडवाणी के भीतर कठिन परिस्थितियों में भी कुछ नया खड़ा करने का संकल्प हमेशा बना रहा। इसी सोच के साथ उन्होंने भारतीय जनसंघ को मजबूत करने और बाद में भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल में पार्टी ने कई बड़े राजनीतिक बदलाव देखे। 1996 में भाजपा पहली बार देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उन्होंने संगठन को मजबूत करने के साथ कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया और राष्ट्र प्रथम के विचार को पार्टी की पहचान बनाने में योगदान दिया।

वैचारिक स्पष्टता और बेबाकी को बताया उनकी सबसे बड़ी ताकत

प्रधानमंत्री ने आडवाणी के व्यक्तित्व की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक क्षमता उन्हें दूसरे नेताओं से अलग पहचान देती थी। उनके भाषणों, लेखों और संसद में दिए गए वक्तव्यों में इसकी झलक देखने को मिलती थी।

इसके अलावा राजनीतिक मुद्दों पर उनका स्पष्ट और निर्भीक रुख भी उनकी पहचान रहा। पीएम मोदी के अनुसार, आडवाणी ने भारतीय राजनीति में छद्म धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे को लेकर खुलकर अपनी बात रखी और देश के राजनीतिक विमर्श को नई दिशा देने में भूमिका निभाई।

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ दोस्ती और भरोसे की मिसाल

लेख में पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के रिश्तों को भी याद किया। उन्होंने लिखा कि दोनों नेताओं ने दशकों तक एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। आडवाणी के लिए अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा नेता और मार्गदर्शक रहे।

मोदी ने कहा कि राजनीति में दो बड़े नेताओं का इतने लंबे समय तक आपसी विश्वास और सम्मान के साथ साथ बने रहना अपने आप में एक अनूठी मिसाल है। दोनों नेताओं के बीच सहयोग और समर्पण की यह परंपरा आज भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है।

यह भी पढ़ें: इंडिगो फ्लाइट को हाईजैक करने की धमकी: टॉयलेट में मिला नोट, बेंगलुरु लौटाया गया विमान; एयरपोर्ट पर इमरजेंसी

संसद से लेकर संगठन तक रहा लंबा राजनीतिक सफर

आडवाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में काम किया और बाद में दिल्ली पहुंचे। वर्ष 1967 में वे दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष बने। इसके बाद 1970 के दशक में उनकी संसदीय यात्रा शुरू हुई।

उन्होंने सांसद, विपक्ष के नेता और केंद्र सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। संसद में उनकी सक्रियता और संसदीय विषयों पर उनकी समझ की प्रधानमंत्री ने सराहना की।

पीएम मोदी ने 1991 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय आडवाणी ने गांधीनगर से चुनाव लड़ने का फैसला किया था। गुजरात से उनका पुराना पारिवारिक जुड़ाव रहा है। उनके पिता विभाजन के बाद कच्छ में आकर बसे थे। ऐसे में गांधीनगर से चुनाव लड़ना उनके लिए घर वापसी जैसा अनुभव था।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख के माध्यम से आडवाणी के लंबे राजनीतिक जीवन, संगठन के प्रति समर्पण और भारतीय राजनीति में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें देश के सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बताया।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन