सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा से एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां अपने अधिकारों और संस्कृति की रक्षा की मांग कर रहे आदिवासी समुदाय पर पुलिस ने बेरहमी से लाठियां बरसाईं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और सरकार की विकास नीतियों पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
यह दृश्य है सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम ’परसोडिकला’ का जहां आदिवासी ग्रामीण अपने हक, अपने जल जंगल ज़मीन और सदियों पुरानी संस्कृति की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। लेकिन शांतिपूर्ण विरोध कर रहे इन ग्रामीणों पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं, आँसू गैस के गोलों से गांव का आसमान धुएँ से भर गया, और महिलाओं पुरुषों में चीख पुकार मच गई।
ग्राम परसोडिकला में गुजरात की एक निजी कंपनी को सरकारी खदान का उत्खनन सौंपे जाने के विरोध में ग्रामीण प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना है कि स्थानीय युवाओं के रोजगार और संसाधनों पर बाहरी कंपनियों का कब्ज़ा कराया जा रहा है, जबकि संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों को कुचल दिया गया है।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर सवालों की झड़ी लग गई है। लोग पूछ रहे हैं कृक्या यही है वह ’‘गुजरात मॉडल’’ जहाँ स्थानीय जनता की आवाज़ दबाकर, उद्योगों के लिए रास्ता बनाया जाता है? क्या सरकार का काम जनता की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि उन्हीं पर लाठियां चलाना है?
सरकारें चाहे केंद्र की हों या राज्य की, दोनों ही आदिवासियों के हितैषी होने का दावा करती हैं, लेकिन ज़मीन पर तस्वीरें बिल्कुल उलट दिखाई देती हैं। सवाल यह है क्या विकास का मतलब स्थानीय समुदाय की आवाज़ को कुचलना है? और कब तक देश के मूल निवासियों को अपने ही अधिकारों के लिए लाठियाँ खानी पड़ेंगी?
आदिवासियों पर पुलि बरसा रही डंडे, सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल
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