शिक्षा सुधारों की दिशा में मध्यप्रदेश बन रहा देश के समक्ष उदाहरण

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55 पीएम एक्सीलेंस महाविद्यालयों और सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से दी जा रही उत्तम शिक्षा
भोपाल। मध्यप्रदेश लगातार मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व नित नए आयाम गढ़ रहा है। चाहे वह मूलभूत ढांचागत विकास हो या फिर नगरीय और ग्रामीण विकास, महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी काफी काम किए जा रहे हैं। सोमवार को शिक्षा की दिशा में भी एक नई इबारत मध्यप्रदेश में गढ़ी गई। मौका था कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में भारत की शिक्षा व्यवस्था का भविष्य विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्य की शिक्षा प्रणाली को भविष्य के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिया राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर जोर
प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को देश में सबसे पहले लागू करने वाला राज्य है। प्रदेश में 55 पीएम एक्सीलेंस कॉलेज और सांदीपनि विद्यालयों के जरिए नैतिक और सांस्कृति मूल्य आधारित व तकनीकी शिक्षा का विस्तार किया जा रहा है। डॉ0 यादव ने आगे कहा कि प्रदेश के इंदौर और रतलाम स्थित सांदीपनि विद्यालयों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में हुआ है, हमारे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र है प्रदेश
इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान वोले कि उज्जैन वैदिक काल से ही समय गणना का प्रमुख केंद्र रहा है। मध्यप्रदेश की शिक्षा परंपरा मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक आधारों पर केंद्रित रही है। अब समय है कि प्राचीन शिक्षा प्रणाली को आधुनिक एआई से जोड़कर दुनिया के समक्ष पेश किया जाए, ताकि दुनिया हमारी समृद्ध संस्कृति और ज्ञान विज्ञान को पहचान सके।
शिक्षा के विस्तार के लिए बड़ा कदम
कार्यक्रम के दौरान पांच विशेष सत्र हुए जिसमें मुख्यरूप से कौशल आधारित शिक्षा, एआई आधारित शिक्षण प्रणाली, विदेशी विश्वविद्यालयों की संभावनाएं, स्कूल शिक्षा सुधार और डिजिटल लर्निंग, उद्योग-अकादमिक सहयोग विषय पर बुद्धिजीवियों ने अपने विचार रखे। उनका माना है कि यह कार्यशाला शिक्षा के व्यापक रूपांतरण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।