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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बड़ा फैसला: भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति

नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने भारत को फिलहाल रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अस्थायी छूट दे दी है। इस फैसले के बाद Reliance Industries ने फिर से रूसी तेल की खरीद की संभावनाओं का आकलन शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इस तेल को अपने उस रिफाइनरी प्लांट में प्रोसेस करने की योजना बना रही है जो मुख्य रूप से घरेलू बाजार के लिए ईंधन तैयार करता है।

सूत्रों के मुताबिक रिलायंस का जो रिफाइनरी प्लांट निर्यात के लिए पेट्रोलियम उत्पाद तैयार करता है, वहां फिलहाल गैर-रूसी ग्रेड के कच्चे तेल का ही इस्तेमाल जारी रहेगा। अमेरिकी नीति में यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump भारत पर रूस से तेल आयात कम करने के लिए दबाव बना रहे थे। पिछले साल भारत की कंपनियों में सबसे ज्यादा रूसी तेल खरीदने वालों में रिलायंस अग्रणी रही थी और उसने लगभग 6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया था।

हाल के महीनों में रूस से आयात घटने के कारण रिलायंस ने अपनी तेल खरीद का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व के देशों से लेना शुरू कर दिया था। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार 2026 में कंपनी के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी पिछले साल की तुलना में काफी कम हो गई है। इसके पीछे एक कारण European Union द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाया गया प्रतिबंध भी बताया जा रहा है।

इधर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। मध्य-पूर्व में अस्थिरता के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ऐसे हालात में अमेरिका द्वारा दी गई यह छूट ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।

डेटा से यह भी संकेत मिलता है कि फिलहाल बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल समुद्री टैंकरों में मौजूद है। करीब 1.5 करोड़ बैरल तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के आसपास जहाजों में रखा हुआ है, जबकि लगभग 70 लाख बैरल तेल सिंगापुर के पास टैंकरों में खड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत पड़ने पर भारतीय रिफाइनरियां इन स्टॉक्स के जरिए तेजी से रूसी तेल की खरीद बढ़ा सकती हैं।

 

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