दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पिता की हल्की-सी डांट से आहत होकर तीन नाबालिग बच्चियां घर छोड़कर ट्रेन में सवार हो गईं। राहत की बात यह रही कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सतर्क नजर ने उन्हें सुरक्षित बचा लिया।
एक छोटी घटना, बड़ा फैसला
सूत्रों के अनुसार यह मामला अर्जुन नगर कैंप-1, दुर्ग का है। जहां 11 साल की एक बच्ची, उसकी 7 साल की छोटी बहन और पास में रहने वाली 10 साल की सहेली 6 फरवरी की शाम घर से बाहर निकलीं। दुकान पर चॉकलेट उठाने की एक छोटी-सी घटना के बाद पिता की डांट बच्ची को इतनी चुभ गई कि उसने घर लौटने के बजाय दूर निकल जाने का फैसला कर लिया। बच्ची को लगा कि घर वापस जाने पर और डांट पड़ेगी। इसी डर और गुस्से में तीनों ने घर न लौटने का मन बना लिया। जब पिता दुकान पहुंचे, तब तक बच्चियां जा चुकी थीं। रातभर तलाश के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला।
CCTV से खुली पूरी कहानी
अगले दिन गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस हरकत में आ गई। DIG विजय अग्रवाल के निर्देश पर कई टीमें बनाई गईं। CCTV फुटेज में तीनों बच्चियां लगातार सड़कों और चौराहों से गुजरती दिखीं। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि वे पावरहाउस रेलवे स्टेशन पहुंच चुकी थीं। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चियां दुर्ग–भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस में बैठ गई थीं। ट्रेन जब बिलासपुर के उसलापुर स्टेशन पहुंची, तो प्लेटफॉर्म पर तैनात RPF हेड कांस्टेबल एस.के. साहू को तीनों पर शक हुआ। RPF ने जब बच्चियों से बात की, तो उन्होंने पूरी कहानी बता दी। इसके बाद उन्हें चाइल्डलाइन बिलासपुर को सौंपा गया और बाल कल्याण समिति के निर्देश पर सुरक्षित आश्रय में रखा गया।
सुरक्षित घर वापसी
सूचना मिलते ही दुर्ग पुलिस बिलासपुर पहुंची और तीनों बच्चियों को सुरक्षित घर लाया गया। DIG विजय अग्रवाल खुद बच्चियों से मिलने पहुंचे, उन्हें प्यार से समझाया और माता-पिता को भी बच्चों के साथ धैर्य और संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी। काउंसलिंग के दौरान बच्चियों ने वादा किया कि वे आगे कभी बिना बताए घर नहीं छोड़ेंगी।


