नर्मदापुरम। प्रदेश में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा जरूरी किए जाने वाले सरकारी फरमान का विरोध अब भाजपा की मर्यादा पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश और केंद्र में सत्ताधारी दल भाजपा के सांसद भी अब शिक्षकों के समर्थन में सामने आ गए हैं। होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र से सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने पात्रता परीक्षा पर केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग की है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिख आपत्ति दर्ज कराई है।
सांसद ने कहा कि प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षक पिछले 25 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं और उनकी नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुरूप हुई थी। ऐसे में अचानक पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने से उनके रोजगार पर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन किया जाए, ताकि पुराने शिक्षकों को इस प्रक्रिया से छूट मिल सके।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो शिक्षक समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसका वे समर्थन करेंगे। इससे पहले भी पार्टी के वरिष्ठ नेता इस आदेश को निरस्त करने की मांग उठा चुके हैं।
केंद्र सरकार के फरमान का भाजपा सांसद ने शिक्षकों के हित में किया विरोध, कहा पुनर्विचार करे सरकार
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