नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमानी सिंह ने अपने खिलाफ चल रही कथित झूठी और द्वेशपूर्ण खबरों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक मानहानी का मुकदमा दायर किया है। शिकायत में कहा कहा गया है कि कुख्यात बाल यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से उनकी कंपनी को आर्थिक मदद उन्हे मिलने की असत्य और निराधार खबरों का प्रसारण किया गया। याचिका में हिमानी ने अदालत को कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर उनके खिलाफ चलाई गई अलग-अलग अकाउंटों से भ्रमित और असत्य खबरों को हटाने की मांग की है। अदालत ने सभी पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को तय की है।
याचिका में हिमायनी पुरी ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर झूठी, भ्रामक और द्वेषपूर्ण सामग्री प्रसारित की जा रही हैं। विशेष रूप से अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से कथित आर्थिक संबंधों से जुड़ी खबरों को उन्होंने निराधार और असत्य बताया है। उन्होंने अदालत से ऐसे सभी पोस्ट, वीडियो और सामग्री को हटाने के निर्देश देने की मांग की है।
अदालत ने पहली नजर में मामला सुनने लायक पाते हुए संबंधित सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही यह स्पष्ट किया कि यह आदेश भारत के भीतर अपलोड किए गए कंटेंट पर लागू होगा, जबकि विदेश से अपलोड सामग्री को भारत में ब्लॉक करने का निर्देश सोशल मीडिया कंपनियों को दिया गया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन यूजर्स ने कथित मानहानिकारक सामग्री पोस्ट की है, वे 24 घंटे के भीतर उसे हटाएं। ऐसा न करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म को सामग्री हटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
हिमायनी पुरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलील दी कि उन्हें एक केंद्रीय मंत्री की बेटी होने के कारण राजनीतिक द्वेष के तहत निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस फर्म से हिमायनी जुड़ी थीं, उसे जेफरी एपस्टीन से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता मिलने का दावा पूरी तरह काल्पनिक है। वहीं, मेटा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि एक मध्यस्थ के रूप में कंपनी बिना न्यायालय या सरकार के निर्देश के किसी कंटेंट को हटाने के लिए बाध्य नहीं है। याचिका में हिमायनी पुरी ने अपनी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान का हवाला देते हुए 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की है।
केंद्रीय मंत्री की बेटी की मानहानि याचिका पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, आपत्तिजनक कंटेंट पर लगाई रोक, 4 हफ्तों में मांगा जवाब
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