रायपुर। देश को नक्सल मुक्त करने की मुहिम की आज अंतिम समयसीमा है। छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभावित जिलों में से एक कांकेर जिले में हलचल तेज हो गई है। गृहमंत्री के इस अभियान के तहत आज शाम तक नक्सली या तो समर्पण कर दें नहीं तो भीषण अभियान चलाया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब केवल 17 नक्सली ही जंगलों में सक्रिय हैं, जिनमें प्रमुख नाम चंदर और रूपी के शामिल हैं। अब सवाल यह है कि क्या शाम तक यह नक्सली भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ेंगे!
देश भर के कई राज्य खासतौर पर छत्तीसगढ़ झारखंड, उड़ीशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश सहित मध्यप्रदेश के कुछ हिस्से नक्सवाद से प्रभावित कई दशकों से रहे हैं। पिछले साल केंद्र सरकार ने गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई में नक्समुक्त अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसी के तहत सुरक्षा बलों ने आत्मसमर्पण के लिए लगातार अपीलें तेज कर दी हैं।
हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों ने अपने साथियों को पत्र लिखकर मुख्यधारा में लौटने की भावुक अपील की है। पत्र में कहा गया है कि अब हथियार छोड़कर परिवार के साथ सामान्य जीवन जीना ही बेहतर विकल्प है। इसके साथ ही संपर्क के लिए पुलिस अधिकारियों के नंबर भी साझा किए गए हैं। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ने चेतावनी दी है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले यदि आत्मसमर्पण नहीं किया गया, तो बड़ा अभियान चलाया जा सकता है।
इस बीच नक्सलवाद के लगभग समाप्त होने के दावे के साथ ही नेताओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि खतरा खत्म हो रहा है, तो उच्च श्रेणी की सुरक्षा क्यों जारी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बचे हुए नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे या फिर जंगलों में अंतिम मुकाबला होगा।
नक्सलवाद का अंतिम पड़ाव, आत्मसमर्पण के चंद घंटे शेष
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