नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद के बजट सत्र को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण देने के कानून को 2029 से लागू करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करने की अपील भी की है। साथ ही दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों में किसी तरह की कटौती न करने का भरोसा भी दिया गया है।
अखिलेश यादव का सीधा हमला
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि- महिला आरक्षण का आधार ही कमजोर है। उनका कहना है कि अगर महिलाओं की आबादी के लिए 2011 की पुरानी जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा, तो पूरा आरक्षण ढांचा ही सवालों के घेरे में आ जाएगा।
साथ ही अखिलेश यादव ने अपने बयान में साफ कहा कि आरक्षण केवल राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि गणित और आंकड़ों पर आधारित प्रक्रिया है। जब आधार ही पुराना होगा, तो उसका परिणाम भी सटीक नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि- ‘जब गिनती ही सही नहीं होगी, तो आरक्षण कैसे सही होगा?’
सपा की मांग
वहीं सपा प्रमुख ने जोर देकर कहा कि सबसे पहले देश में नई जनगणना कराई जानी चाहिए, ताकि महिलाओं की वास्तविक संख्या सामने आए। इसके बाद ही महिला आरक्षण को लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं की सही गिनती से बच रही है, और बिना ठोस आधार के बड़ा फैसला लेने की कोशिश कर रही है।

