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ग्लैमर से संन्यास तक: हर्षा रिछारिया बनीं ‘स्वामी हर्षानंद गिरि’

उज्जैन। सोशल मीडिया और मॉडलिंग की दुनिया से आध्यात्म की राह पर बड़ा कदम उठाते हुए हर्षा रिछारिया ने संन्यास ग्रहण कर लिया है। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में वैदिक परंपराओं के बीच उन्होंने औपचारिक रूप से सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यासी जीवन अपनाया।

गुरु दीक्षा के साथ नई पहचान

जानकारी को अनुसार, हर्षा रिछारिया ने पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि से संन्यास की दीक्षा ली। दीक्षा के बाद उन्हें नया नाम ‘स्वामी हर्षानंद गिरि’ दिया गया, जो उनके नए आध्यात्मिक जीवन और पहचान का प्रतीक है।

पुराने जीवन का अंत

बता दें संन्यास की प्रक्रिया सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह एक गहरी आध्यात्मिक और वैदिक परंपरा है। हर्षा ने संन्यास के दौरान शिखा, दंड त्याग संस्कार, तर्पण ,श्राद्ध कर्म और पिंडदान की विधि पूरी कर अपने पिछले जीवन से पूर्ण विराम लिया। यह प्रक्रिया प्रतीकात्मक रूप से पुराने अस्तित्व को त्यागकर नए आध्यात्मिक जन्म को स्वीकार करने का संकेत मानी जाती है।

वहीं संन्यास के बाद स्वामी हर्षानंद गिरि ने कहा कि यह उनके जीवन की नई शुरुआत है। उन्होंने अपने गुरु के मार्गदर्शन में धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा को अपना लक्ष्य बताया। उन्होंने यह भी कहा कि संन्यास केवल वेश परिवर्तन नहीं, बल्कि सोच, जीवनशैली और उद्देश्य का पूर्ण परिवर्तन है जिसे वे पूरी निष्ठा से निभाने का संकल्प लेती हैं।

गुरु का संदेश

साथ ही महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि ने दीक्षा के दौरान कहा कि संन्यास एक कठिन और अनुशासित जीवन है, जिसमें व्यक्ति को अपनी पुरानी पहचान, इच्छाओं और भौतिक आकर्षणों का त्याग करना पड़ता है। उन्होंने सभी संन्यासियों से अपील की कि वे इस पवित्र परंपरा की गरिमा को बनाए रखें और अपने आचरण से समाज के लिए उदाहरण बनें।

 

 

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