कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखकर सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। इस चिट्ठी में उन्होंने न केवल अपने चुनावी अनुभव साझा किए, बल्कि ‘विकसित बंगाल’ के विजन और बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया।
आपका स्नेह मेरी सबसे बड़ी ताकत– पीएम
प्रधानमंत्री ने पत्र की शुरुआत बंगाल की जनता के प्रति आभार जताते हुए की। उन्होंने लिखा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें जो प्यार, समर्थन और आशीर्वाद मिला, उसने उन्हें नई ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने खास तौर पर युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और व्यापारियों के उत्साह का जिक्र करते हुए कहा कि हर वर्ग ‘विकसित बंगाल’ के सपने के साथ खड़ा नजर आ रहा है।
पीएम मोदी ने अपने चुनावी दौरे को एक आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हुए लिखा कि बंगाल की रैलियां और रोड शो उनके लिए किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं रहे। उन्होंने कहा कि इतनी गर्मी और व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्हें थकान महसूस नहीं हुई, क्योंकि जनता का स्नेह उन्हें लगातार प्रेरित करता रहा।
उन्होंने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले किए गए अनुष्ठान का जिक्र करते हुए कहा कि इस चुनाव के दौरान भी उन्हें वैसी ही आध्यात्मिक अनुभूति हुई।
हर वर्ग बदलाव के लिए तैयार
पत्र में प्रधानमंत्री ने यह भी लिखा कि बंगाल का युवा अब अवसर चाहता है, महिलाएं सुरक्षा और सम्मान की अपेक्षा रखती हैं, जबकि किसान और श्रमिक बेहतर भविष्य की उम्मीद में हैं। उनके मुताबिक, राज्य का हर नागरिक अब एक नई दिशा और नए नेतृत्व की तलाश में है। पीएम मोदी ने अपने संदेश में साफ कहा कि बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने लिखा- भय बहुत हुआ, अब भरोसा चाहिए।
यह लाइन इस पत्र का केंद्रीय संदेश बनकर उभरी, जिसमें उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए जनता से नए विकल्प पर विचार करने की अपील की।
इस पत्र के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इसे जनसमर्थन का प्रतीक बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहा है।

