इस्लामाबाद। पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच आर्थिक रिश्तों में अचानक कड़वाहट आ गई है। UAE ने जब अपने 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को आगे बढ़ाने से इनकार किया, तो पाकिस्तान को मजबूरी में यह रकम लौटाने का ऐलान करना पड़ा। इस फैसले ने पहले से दबाव झेल रही पाक अर्थव्यवस्था पर और बोझ डाल दिया है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत पहले ही बेहद नाजुक बनी हुई है। विदेशी मुद्रा भंडार सीमित है और लगातार बढ़ते खर्चों के बीच यह भुगतान बड़ा झटका साबित हो सकता है।
रोलओवर की उम्मीद टूटी
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक को उम्मीद थी कि UAE कर्ज की अवधि बढ़ा देगा, जैसा पहले होता रहा है। लेकिन इस बार UAE ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि अब भुगतान करना ही होगा। इससे इस्लामाबाद के रणनीतिक प्लान पर पानी फिर गया।
नेता का विवादित बयान
बता दें कर्ज वापसी के फैसले के बीच पाकिस्तान के एक वरिष्ठ नेता ने विवादित बयान देकर माहौल और भी गर्म कर दिया। उन्होंने तंज भरे अंदाज में UAE को ‘जरूरतमंद’ बताते हुए कहा कि उसे पैसों की ज्यादा जरूरत है। इतना ही नहीं, उन्होंने ‘अखंड भारत’ का जिक्र कर बयान को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया।
मिडिल ईस्ट संकट का भी असर
साथ ही मध्य पूर्व में जारी तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चुनौतियों ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ऊर्जा संकट और महंगाई पहले ही चरम पर है, ऐसे में यह भुगतान स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
कर्ज पर टिकी अर्थव्यवस्था
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से बाहरी कर्ज पर निर्भर रही है। चीन, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों से मिलने वाले कर्ज से ही आर्थिक संतुलन बना रहता था। लेकिन अब UAE के सख्त रुख ने साफ संकेत दे दिया है कि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा।

