चलती ट्रेन में दर्दनाक घटना, जज की पत्नी की हुई मौत

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रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जिसने ट्रेन यात्रा की सुरक्षा और अचानक होने वाली स्वास्थ्य आपात स्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कांचीगुड़ा–भगत की कोठी एक्सप्रेस में सफर कर रही एक महिला की ट्रेन के वॉशरूम में मौत हो गई।

अलग-अलग कोच में कर रहे थे यात्रा

जानकारी के मुताबिक, राजकुमार चौहान और उनकी पत्नी उषा चौहान जोधपुर से निंबाहेड़ा लौट रहे थे। दोनों ट्रेन में एक ही यात्रा पर थे, लेकिन उनका रिजर्वेशन अलग-अलग कोच में था। इसी कारण वे सफर के दौरान अलग डिब्बों में बैठे हुए थे। यात्रा के दौरान दोनों के बीच फोन पर बातचीत भी होती रही और सब कुछ सामान्य लग रहा था। निंबाहेड़ा स्टेशन आने से कुछ समय पहले उषा चौहान ने अपने पति को फोन किया और बताया कि वह वॉशरूम जा रही हैं। उस समय किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। इसके कुछ ही देर बाद ट्रेन निंबाहेड़ा स्टेशन पहुंच गई। जज राजकुमार चौहान अपने कोच से उतरकर पत्नी का इंतजार करने लगे, लेकिन वह प्लेटफॉर्म पर नहीं पहुंचीं। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद वह दूसरे दरवाजे से उतर गई होंगी या फिर सामान लेने में देर हो रही होगी।

स्टेशन पर इंतजार, फिर बढ़ी चिंता

समय बीतने के साथ जब उषा चौहान प्लेटफॉर्म पर नहीं दिखाई दीं, तो राजकुमार चौहान की चिंता बढ़ने लगी। उन्होंने आसपास के यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों से पूछताछ की, लेकिन किसी को भी महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसी बीच ट्रेन निंबाहेड़ा स्टेशन से आगे के लिए रवाना हो चुकी थी। पत्नी के अचानक गायब हो जाने से परेशान जज ने तुरंत रेलवे पुलिस से संपर्क किया और पूरी जानकारी दी। रेलवे पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू की। सबसे पहले ट्रेन के अगले स्टेशनों को अलर्ट किया गया और ट्रेन को जांच के लिए रोकने की योजना बनाई गई। पुलिस ने मंदसौर स्टेशन पर ट्रेन को रुकवाने का फैसला किया ताकि वहां महिला की तलाश की जा सके।

ट्रेन में तलाश लेकिन नहीं मिला सुराग

मंदसौर स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद रेलवे पुलिस और कर्मचारियों ने कई कोचों की जांच की। यात्रियों से भी पूछताछ की गई, लेकिन उषा चौहान का कोई सुराग नहीं मिला। इससे मामला और भी रहस्यमय होता चला गया। पुलिस को शक हुआ कि महिला शायद ट्रेन से उतरी ही नहीं हैं और कहीं कोच के भीतर ही मौजूद हो सकती हैं। इसी दौरान महिला के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस की गई। मोबाइल लोकेशन ने जांच को एक नई दिशा दी। लोकेशन से पता चला कि फोन अभी भी उसी ट्रेन में मौजूद है। इससे पुलिस को भरोसा हुआ कि महिला ट्रेन से बाहर नहीं गई हैं और ट्रेन के किसी हिस्से में ही हो सकती हैं। इसके बाद पुलिस ने ट्रेन को आगे जावरा स्टेशन पर रुकवाने का निर्णय लिया।

मोबाइल लोकेशन से मिला अहम सुराग

जावरा स्टेशन पर ट्रेन को रोका गया और पुलिस टीम तुरंत उस कोच में पहुंची जिसमें उषा चौहान का रिजर्वेशन था। कोच के भीतर सभी सीटों और गलियारों की जांच की गई। इसी दौरान एक वॉशरूम का दरवाजा अंदर से बंद पाया गया। पुलिस और रेलवे कर्मचारियों ने दरवाजा खटखटाकर अंदर से प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला। इससे शक और बढ़ गया। स्थिति को गंभीर देखते हुए पुलिस ने दरवाजा तोड़ने का फैसला किया। जब वॉशरूम का दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी चौंक गए। उषा चौहान अंदर अचेत अवस्था में पड़ी हुई थीं। उन्हें तुरंत बाहर निकाला गया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

महिला को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने आशंका जताई कि उनकी मौत साइलेंट हार्ट अटैक की वजह से हुई है। साइलेंट हार्ट अटैक में अक्सर व्यक्ति को तेज दर्द या स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते और अचानक स्थिति गंभीर हो जाती है। इस कारण कई बार व्यक्ति को समय पर मदद नहीं मिल पाती। पुलिस ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, ताकि मौत के सही कारण की पुष्टि हो सके।

परिवार में छाया मातम

इस घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। एक सामान्य ट्रेन यात्रा इस तरह दर्दनाक अंत में बदल जाएगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था। रेलवे अधिकारियों ने सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद महिला का शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार के लोग गहरे सदमे में हैं और इस दुखद घटना को स्वीकार करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि यात्रा के दौरान अचानक स्वास्थ्य आपात स्थितियां कितनी गंभीर रूप ले सकती हैं और ऐसे मामलों में त्वरित सहायता और जागरूकता कितनी जरूरी है।

 

 

 

 

 

 

 

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