भोपाल। Madhya Pradesh Vidhan Sabha के बजट सत्र के दूसरे दिन हंगामे के बीच सामाजिक न्याय और बजट आवंटन का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। शोर-शराबे के शांत होने के बाद कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने सदन में आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) के विकास के लिए जारी होने वाला बजट समान रूप से वितरित नहीं किया जा रहा है।
‘राजनीतिक प्राथमिकता’ के आधार पर बजट आवंटन का आरोप
बरैया ने कहा कि जिन क्षेत्रों में सत्तारूढ़ दल के विधायक हैं या जहां पार्टी की जीत की संभावना अधिक है, वहां विकास योजनाओं और फंड का प्रवाह ज्यादा दिखता है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में SC-ST समुदाय के लिए अपेक्षित बजट और परियोजनाएं नहीं पहुंच रहीं। फूल सिंह बरैया का कहना है कि सामाजिक न्याय के नाम पर असमान वितरण लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।
योजनाओं में गिरावट और बैंकिंग प्रक्रिया पर सवाल
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि पहले जो योजनाएं सीधे लाभार्थियों तक पहुंचती थीं- जैसे डायरेक्ट लोन या सब्सिडी आधारित सहायता, अब या तो सीमित हो गई हैं या प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो रहीं। उन्होंने बैंकिंग प्रक्रियाओं में जटिलता, कथित कमीशनखोरी और लाभार्थियों को हतोत्साहित करने जैसी शिकायतों का जिक्र किया। बरैया के मुताबिक, यदि स्वरोजगार और वित्तीय समावेशन की योजनाएं कमजोर होती हैं तो SC-ST और OBC समुदाय की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
आउटसोर्सिंग मॉडल और रोजगार पर चिंता
वहीं विधायक बरैया ने सरकारी विभागों में बढ़ती आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि- स्थायी भर्ती के बजाय कॉन्ट्रैक्ट मॉडल पर निर्भरता से रोजगार सुरक्षा प्रभावित होती है और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को स्थिर अवसर नहीं मिल पाते। विधायक ने मांग करते हुए कहा कि- राज्यपाल के अभिभाषण और बजट दस्तावेजों में SC-ST सशक्तिकरण के स्पष्ट रोडमैप का उल्लेख होना चाहिए।


