काबुल: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान सरकार ने इस्लामाबाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं और नाकामियों के लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराना बंद करे। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारी बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय बयानबाजी और दुष्प्रचार में लगे हुए हैं।
मुजाहिद ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान की राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उसकी अपनी चुनौतियां हैं। इनका दोष दूसरे देशों पर डालने से हालात नहीं सुधरेंगे। उन्होंने पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों पर दोनों देशों के बीच बातचीत का माहौल खराब करने का भी आरोप लगाया।
पाकिस्तान की नीतियों पर उठाए सवाल?
तालिबान प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान के सामने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं हैं। इनका असर केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अधिकारियों को अफगानिस्तान पर आरोप लगाने के बजाय अपनी समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। मुजाहिद ने पाकिस्तानी सरकार से अपने नागरिकों और राजनीतिक नेतृत्व के अधिकारों का सम्मान करने की भी अपील की।
आतंकी संगठनों को पनाह देने के आरोपों से इनकार
तालिबान की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान के बयान के बाद सामने आई है। सज्जाद ने 9 अक्टूबर को मीडिया ब्रीफिंग में दावा किया था कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और अन्य सशस्त्र संगठनों को अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाने मिल रहे हैं।
पाकिस्तान का दावा है कि उसने इन संगठनों के ठिकानों से जुड़ी जानकारी तालिबान अधिकारियों को दी है। साथ ही अफगानिस्तान की जमीन से पाकिस्तान में होने वाले हमलों को रोकने की मांग भी की है।
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सीमा पर तनाव से आम नागरिकों की बढ़ी परेशानी
पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध लगातार खराब हुए हैं। दोनों देशों की सीमा पर गोलीबारी और हवाई हमलों की घटनाओं ने तनाव और बढ़ा दिया है। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के अनुसार, 1 अक्टूबर को कुनार और हेलमंद प्रांतों में हुए कथित पाकिस्तानी हवाई हमलों में 10 लोगों की मौत हुई थी, जबकि नौ अन्य घायल हुए थे।
सीमा पर बढ़ते तनाव के कारण आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र भी सीमा पार होने वाली हिंसा से नागरिकों को बचाने की जरूरत पर जोर देता रहा है।

