Sunday, October 18, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsCJP के तीनों नेता 23 घंटे बाद रिहा, सुप्रीम कोर्ट बोला- शांतिपूर्ण...

CJP के तीनों नेता 23 घंटे बाद रिहा, सुप्रीम कोर्ट बोला- शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लें

नई दिल्ली: दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीनों नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका 23 घंटे बाद रिहा हो गए। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पर रोक लगाई और मेट्रो-इंटरनेट सेवाएं सामान्य रखने के निर्देश दिए। अदालत ने 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन पर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से मंगलवार तक जवाब भी मांगा।

मेट्रो-इंटरनेट बहाली और हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

रविवार को जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की विशेष पीठ ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इंटरनेट सेवाएं बाधित करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में नहीं लिया जाए। साथ ही, नागरिकों की आवाजाही सामान्य रखने पर जोर दिया।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह न रोकी जाए। इसके बावजूद 10 अक्टूबर को कई मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। इस पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा कि आदेश की कथित अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

303 में से 45 मेट्रो स्टेशन किए गए थे बंद

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) से 10 अक्टूबर को बंद और खुले मेट्रो स्टेशनों का नक्शा पेश करने को कहा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दिल्ली के 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 बंद किए गए थे। हालांकि, निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 4,157 ट्रेन यात्राएं संचालित हुईं।

इस पर पीठ ने कहा कि केवल बंद स्टेशनों की संख्या बताना पर्याप्त नहीं है। मेट्रो लाइन के बीच के स्टेशन बंद होने और दोनों छोर के स्टेशन खुले रहने से यात्रियों को परेशानी हो सकती है। अदालत ने बंद स्टेशनों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नक्शा मांगा।

केंद्र सरकार की ओर से तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और सभी मेट्रो स्टेशन तथा ट्रेनें चालू हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों के कामकाज में बाधा नहीं आने दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास से बैरिकेड हटाने के निर्देश

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू होने की जानकारी देने वाला बोर्ड हटाने का निर्देश दिया। इस धारा के तहत सक्षम अधिकारी कुछ परिस्थितियों में लोगों के जमावड़े और गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। पीठ ने कहा कि ऐसी व्यवस्था के कारण नागरिकों और वकीलों को न्याय तक पहुंचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बैरिकेड हटाने और लोगों की आवाजाही बहाल करने की तत्काल मांग की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के बाहर से बैरिकेड हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

वकील ने कहा- मामला केवल वकीलों के अधिकारों का नहीं

वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत को बताया कि शनिवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने दावा किया कि उन्हें चलती बस में फेंक दिया गया। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन की याचिका का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मामला केवल वकीलों के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े और शादान फरासत ने पैरवी की। वहीं, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा।

50-50 हजार रुपये का मुचलका भरने पर रिहाई

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को BNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। रविवार को तीनों को दिल्ली कैंट की संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया।

तीनों ने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार के लिए 50-50 हजार रुपये का जमानती मुचलका भरा। इसके बाद अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश दिया। मुचलके की शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत राशि जब्त हो सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि तीनों एक साल तक प्रदर्शन नहीं कर सकते। किसी नए अपराध की स्थिति में पुलिस अलग से कार्रवाई कर सकती है।

राजीव चौक पर SFI अध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ता हिरासत में

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच दिल्ली पुलिस ने रविवार को राजीव चौक पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। SFI के मुताबिक, कार्यकर्ता जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया और पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर चली गई। संगठन ने बस के अंदर से वीडियो जारी किया, जिसमें कुछ कार्यकर्ता चोटिल दिखाई दे रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और एहतियातन हिरासत को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं। एक याचिका में 9 अक्टूबर के आदेश का पालन नहीं करने के आरोप में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC चेयरपर्सन डी. थारा के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।

यह भी पढ़ें: सीजेपी प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: मेट्रो सामान्य रखने के निर्देश, 47 स्टेशनों का नक्शा मांगा

दूसरी याचिका में विपक्षी नेताओं की एहतियातन हिरासत को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को दबाने के लिए किया गया। याचिका में निहत्थे नागरिकों से मारपीट, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी और पुलिसकर्मियों के पहचान चिह्न नहीं लगाने के आरोप भी लगाए गए हैं। अदालत ने मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

11 to 17 October 2026
4 October to 10 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन