कोलकाता में I-PAC छापों से जुड़े मामले ने अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज़ पर सियासी और कानूनी टकराव का रूप ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई के दौरान ED ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर रेड के दौरान दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं बंगाल सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री केवल लैपटॉप और निजी मोबाइल फोन लेकर गई थीं। मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि सरकार नोटिस जारी करने से अदालत को नहीं रोक सकती और पूरे प्रकरण की जांच होगी।
पुलिस को किया जाए निलंबित
इस मामले पर ED का कहना है कि- यह सीधे-सीधे चोरी का मामला है। बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों का मोबाइल भी छीन लिया और ममता मीडिया के सामने भी गई। इस तरह की घटना से ED अधिकारियों का मनोबल गिरेगा। साथ ही वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए।
लैपटॉप में चुनाव से जुड़ी जानकारी
बंगाल सरकार का पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा- I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनाव से जुड़ी सारी जानकारी थी। वह लैपटॉप और उनका निजी आईफोन लेकर गई थीं। CM ने रेड में कोई बाधा नहीं डाली थी। I-PAC के पास TMC के दस्तावेज थे, इसीलिए ED वहां गई थी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि- आपका दावा गलत है। अगर ED का इरादा दस्तावेज जब्त करने का होता, तो वे जब्त कर लेते। लेकिन कुछ भी जब्त नहीं किया गया। हमें जांच करनी होगी। सरकार हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकती।


