इंदौर। सुशासन और धर्मनिष्ठा की प्रतीक देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा हटाए जाने का मामला अब देशव्यापी सियासी बहस में बदल गया है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित अहिल्या घाट से उनकी प्रतिमा और उससे जुड़े मंदिर को हटाने की कार्रवाई के बाद काशी से लेकर मध्यप्रदेश तक आक्रोश फैल गया है।
स्थानीय संगठनों और इतिहास प्रेमियों का कहना है कि यह प्रतिमा केवल पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि उस शासिका की स्मृति है जिन्होंने काशी के घाटों और मंदिरों का पुनर्निर्माण कर शहर को नई पहचान दी। ऐसे में इसे हटाना श्रद्धा और ऐतिहासिक विरासत दोनों का अपमान माना जा रहा है।
इस मुद्दे पर इंदौर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। ऐतिहासिक राजवाड़ा परिसर में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए और प्रदेश सरकार व भाजपा पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती भव्य रूप से मना रही है, दूसरी ओर उनकी स्मृतियों को मिटाया जा रहा है। इसे उन्होंने भाजपा का दोहरा चरित्र करार दिया।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अहिल्याबाई द्वारा पुनर्निर्मित घाटों के सम्मान में स्थापित प्रतिमा हटाना करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई तकनीकी और व्यवस्थागत कारणों से की गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों को यह तर्क स्वीकार नहीं है।
देवी अहिल्याबाई होलकर को काशी, उज्जैन और सोमनाथ जैसे तीर्थ स्थलों के पुनरोद्धार के लिए आज भी श्रद्धा से याद किया जाता है। यही वजह है कि उनकी प्रतिमा से जुड़ा हर फैसला बेहद संवेदनशील बन जाता है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रतिमा और मंदिर की दोबारा स्थापना कब होगी और सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
अहिल्याबाई की प्रतिमा हटते ही सियासी तूफानः काशी से इंदौर तक विरोध, राजवाड़ा पर कांग्रेस का धरना


