बालाघाट: जिले के किरनापुर थाना पुलिस पर दो माह की गर्भवती महिला और उसके पति को चोरी के मामले में पूछताछ के दौरान कथित तौर पर अमानवीय तरीके से मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। सोमवार को घायल महिला की हालत इतनी खराब थी कि परिजन उसे खाट पर लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच गए। महिला की स्थिति देखकर प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल उसे जिला अस्पताल पहुंचाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा भी जिला अस्पताल पहुंचे और पीड़ित महिला व उसके परिजनों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। शिकायत के बाद एसपी ने किरनापुर थाना प्रभारी, एक उपनिरीक्षक, दो पुरुष आरक्षकों और एक महिला आरक्षक समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच महिला एसआईटी को सौंपी गई है।
2 सितंबर को पोस्ट ऑफिस में हुई थी चोरी
पीड़ित परिवार के अनुसार, किरनापुर थाना क्षेत्र के ग्राम टिमकीटोला निवासी कैलाश चौधरी की पत्नी सावित्री चौधरी (लगभग 30 वर्ष) करीब दो माह की गर्भवती हैं। कैलाश का आरोप है कि 2 सितंबर को क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस में चोरी की घटना हुई थी।
इसके बाद किसी व्यक्ति द्वारा लगाए गए कथित आरोप के आधार पर पुलिस कैलाश और उसकी पत्नी सावित्री को उनके घर से थाने ले गई। परिवार का आरोप है कि उन्हें थाने ले जाने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और पूछताछ के नाम पर दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।
बेल्ट और डंडे से मारपीट का आरोप
कैलाश चौधरी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे और उसकी पत्नी को अलग-अलग कमरों में रखा। इसके बाद दोनों के साथ गाली-गलौज करते हुए बेल्ट और डंडे से मारपीट की गई। कैलाश का आरोप है कि मारपीट के दौरान उसकी पत्नी सावित्री पर चोरी कबूल करने का दबाव बनाया गया। परिवार के मुताबिक, कथित मारपीट के बाद दोनों की हालत बिगड़ गई और उन्हें घर छोड़ दिया गया।
परिजनों का कहना है कि घटना के बाद से सावित्री की तबीयत लगातार खराब थी और वह करीब पांच दिनों तक गंभीर हालत में घर पर ही पड़ी रही। इसके बाद सोमवार को परिजन उसे खाट पर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे।
शिकायत करने पर धमकाने का भी आरोप
पीड़ित परिवार ने पुलिसकर्मियों पर धमकी देने का आरोप भी लगाया है। कैलाश के मुताबिक, उन्हें कथित तौर पर चेतावनी दी गई थी कि यदि उन्होंने घटना की शिकायत कहीं की तो उनके खिलाफ अन्य मामलों में कार्रवाई की जाएगी और उन्हें गांव से बाहर कर दिया जाएगा। हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पूर्व सैनिक समेत ग्रामीणों ने उठाई आवाज
मामले की जानकारी मिलने के बाद पूर्व सैनिक तोमेश्वर राहंगडाले सहित अन्य ग्रामीण पीड़ित परिवार के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। महिला की गंभीर हालत देखकर प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल उसे जिला अस्पताल भेजने की व्यवस्था की।
परिजनों और ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, कथित झूठी एफआईआर को हटाने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
एसपी ने अस्पताल पहुंचकर ली जानकारी
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा जिला अस्पताल पहुंचे और घायल महिला व उसके परिजनों से बातचीत कर घटना की जानकारी ली।
एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए किरनापुर थाना स्टाफ के संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच महिला एसआईटी को सौंपी गई है। एसपी ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है तथा जांच के लिए सात दिन का समय मांगा है।
थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मी निलंबित
पुलिस विभाग के अनुसार, गंभीर शिकायत सामने आने के बाद किरनापुर थाना प्रभारी, एक उपनिरीक्षक, दो पुरुष आरक्षक और एक महिला आरक्षक को निलंबित किया गया है। शिकायत में महिला और उसके पति के साथ थाने में कथित तौर पर कपड़े उतरवाकर मारपीट किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
फिलहाल महिला का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। पूरे मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस हिरासत के दौरान वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

