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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच कश्मीर पर अमेरिका का स्पष्ट रुख, पाकिस्तान को कड़ा संदेश

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की चर्चा के बीच कश्मीर को लेकर अमेरिका का रुख पूरी तरह साफ़ हो गया है। जिस पर ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है और किसी भी तरह के निराधार क्षेत्रीय दावों का समर्थन नहीं करता।

अमेरिकी नक्शे में भारत का हिस्सा जम्मू-कश्मीर

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक नक्शे में जम्मू-कश्मीर को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। खास बात यह है कि इस नक्शे में पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र, यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK), भी भारत के नक्शे में शामिल है। यह कदम पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

ट्रंप प्रशासन का साफ संकेत

अमेरिका ने बिना किसी कूटनीतिक घुमाव के यह साफ कर दिया है कि वह जमीन पर मौजूद वास्तविकता का समर्थन करता है। ट्रंप प्रशासन का यह रुख दिखाता है कि अमेरिकी नेतृत्व भारत के राजनीतिक और भौगोलिक नक्शे से सहमत है और झूठे दावों के साथ खड़ा नहीं होगा।

पाकिस्तान की उम्मीदों को बड़ा झटका

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान खुद को अमेरिका का करीबी सहयोगी बताने की कोशिश कर रहा था। कुछ ही दिनों पहले तक इस्लामाबाद यह संदेश देने में जुटा था कि वॉशिंगटन उसके पक्ष में नरम रुख अपना सकता है। लेकिन अमेरिकी नक्शे ने पाकिस्तान की इन उम्मीदों को झटका दे दिया है और कश्मीर पर अमेरिका का स्टैंड पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। हालाकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल के महीनों में अमेरिका से रिश्ते सुधारने की कई कोशिशें कीं। वॉशिंगटन के गलियारों में लगातार दौरे हुए, लेकिन इन प्रयासों का कश्मीर के मुद्दे पर कोई असर नजर नहीं आया।
अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि दशकों से फैलाए जा रहे क्षेत्रीय दावों को वह स्वीकार नहीं करेगा।

रणनीतिक हित अलग, कश्मीर पर रुख अलग

हालांकि अमेरिका की पाकिस्तान में रुचि अभी भी बनी हुई है, खासतौर पर दुर्लभ खनिजों और सैन्य उपकरणों के व्यापार को लेकर, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका पाकिस्तान के अनुचित दावों का समर्थन करेगा। कश्मीर पर अमेरिकी नीति स्पष्ट, स्थिर और भारत के पक्ष में दिखाई देती है। सबसे बड़ा संदेश यही है कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए एक सीमित हित वाला देश हो सकता है, लेकिन भारत का कोई विकल्प नहीं है। भारत न सिर्फ अमेरिका का अहम व्यापारिक साझेदार है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में उसकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है। यही वजह है कि अमेरिका ने कूटनीतिक रूप से ऐसा कदम उठाया है, जिसकी गूंज इस्लामाबाद तक सुनाई दे रही है।

 

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