बालाघाट: भारतीय जनता पार्टी जिस संगठनात्मक अनुशासन, संस्कार और चरित्र की दुहाई देती है, उसी संगठन के युवा मोर्चा में अब नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। कल गुरुवार रात भाजपा युवा मोर्चा ने 19 जिलों के भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। उस लिस्ट में भाजपा से युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष अमन गांधी को बनाया गया है।
आपको बता दें कि भाजपा युवा मोर्चा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अमन गांधी जिलाध्यक्ष बनने के जश्न में इस कदर मगरूर हो गए कि परिवार के सदस्यों के साथ शराब के नशे में बेरहमी से मारपीट करने लगे। पीड़ित पूजा गांधी की शिकायत अनुसार जिलाध्यक्ष बनने के जश्न के दौरान ही देवर अमन गांधी और ससुर कुलदीप गांधी, बड़े ससुर नरेंद्र गांधी, विजय गांधी इन सभी लोगों ने मिलकर अभिषेक गांधी और उनकी पत्नी पूजा गांधी के साथ मारपीट की।



मामला इतना बढ़ा कि 100 डायल तक घर आ गई और विवाद कोतवाली थाने तक पहुंच गया। जहाँ पीड़ित पक्ष अभिषेक गांधी और उनकी पत्नी पूजा गांधी द्वारा शिकायत दर्ज कराने की बात सामने आ रही है, शिकायतकर्ता के अनुसार इससे पहले भी अमन गांधी द्वारा अपने बड़े भाई और भाभी से बेरहमी से मारपीट की गई थी जिसकी विवेचना चल रही है। जानकारी के अनुसार पार्टी के अन्य लोग उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन नियुक्ति के जश्न के बीच मारपीट के आरोपों ने भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आखिर जिन युवाओं के कंधों पर संगठन की छवि और भविष्य की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, उनके आचरण की कसौटी क्या है? क्या संगठन में पद और प्रतिष्ठा देने से पहले व्यक्ति की सामाजिक छवि और पृष्ठभूमि की पड़ताल नहीं की जाती?
विवादित चेहरे को मिली भाजयुमो जिलाध्यक्ष की कमान
आपको बता दें कि अमन गांधी वह शख्स है, जिस पर पूर्व में भी दो बार शहर के अन्य लोगों से मारपीट गुंडागर्दी के मामले दर्ज हुए हैं। साथ ही वह नगरपालिका की ब्लैक लिस्टेड निर्माण एजेंसी व कंपनी अमन गांधी के परिवार की ही बताई जा रही है। इसके अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सोहागपुरे जो कि बलात्कार का आरोपी है उससे भी उसकी नजदीकी संबंध है। भाजयुमो जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद जश्न मनाने बलात्कार के आरोपी भूपेंद्र सोहागपुरे के पास गए जिसकी फोटो भी सोशल मीडिया में सार्वजनिक हुई है। जिस वजह से भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा गरम है। क्योंकि पूर्व जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सोहागपुरे की भी छवि कलंकित है। अब सवाल यही है कि जिनकी मित्रता बलात्कार के आरोपियों से हो, उनके कुशल चरित्र और व्यवहार की कल्पना कैसे की जा सकती है।
गौरतलब है कि तत्कालीन भाजयुमो जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सोहागपुरे के खिलाफ एक शिक्षिका की शिकायत पर महिला थाना पुलिस ने दुष्कर्म, धमकी और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। यह मामला उस समय प्रदेश की राजनीति में भी सुर्खियों में रहा था। वहीं, अमन गांधी पर भी पूर्व से ही दो आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की बात कही जा रही है। फिर भी उनके आचरण को संगठन के उच्च पदाधिकारियों द्वारा ना तो परखा गया और ना ही उनके चाल-चलन की पहले जाँच की गई और अचानक उसे भाजयुमो का जिलाध्यक्ष बना दिया गया। जहाँ जिलाध्यक्ष की कमान मिलते ही उसके आचरण को उजागर करते कारनामे सामने आने लगे हैं।
अब सवाल भाजपा जिला नेतृत्व से है कि क्या ऐसे विवादों पर संगठन संज्ञान लेगा या फिर पद की आड़ में गंभीर आरोपों को नजरअंदाज किया जाएगा? भाजपा में आखिर यह कैसा अनुशासन, कैसी संस्कारों की राजनीति और कैसा युवा नेतृत्व चलाया जा रहा है। फिलहाल परिजनों से बर्बरतापूर्वक मारपीट के आरोपों को लेकर कोतवाली थाने में चहल-पहल देखने मिल रही है। लेकिन इस पर पुलिस की ओर से प्रतिक्रिया आना बाकी है। वहीं सूत्रों की मानें तो मामले को आपसी समझौते में खत्म करने की बातें हो रही हैं।

