ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज करते हुए तारिक रहमान ने मंगलवार को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ 25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण के साथ अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी अंतरिम व्यवस्था का 18 महीनों का दौर औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने परंपरा से अलग जाकर शपथ समारोह को बंगभवन के बजाय जातीय संसद के ‘साउथ प्लाजा’ में आयोजित किया, जो इस राजनीतिक ट्रांजिशन की प्रतीकात्मक अहमियत को दर्शाता है।

17 साल बाद वापसी
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर्रहमान के पुत्र रहमान लगभग 17 वर्षों तक लंदन में स्वनिर्वासन में रहे। दो महीने पहले स्वदेश लौटने के बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक कदम है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के संसदीय दल ने उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना, जिसके बाद प्रधानमंत्री पद की राह साफ हुई। उनका कार्यकाल पांच वर्षों का होगा।
बीएनपी की मजबूत वापसी
12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हुई थी।
अंतरिम दौर का अंत
अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने शपथ से एक दिन पहले इस्तीफा दे दिया। उनके कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में ठंडापन देखने को मिला था। नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिसरी मौजूद रहे।

