भोपाल: राजधानी भोपाल में नगर निगम सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब शहर की व्यवस्थाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। घरों से कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंचने के कारण कई इलाकों में कचरे के ढेर लगने लगे हैं। बाजारों और रहवासी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस बीच कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई भी बंद करने की चेतावनी दी है। ऐसे में दीपावली से पहले राजधानी में सफाई के साथ पेयजल व्यवस्था पर भी संकट खड़ा होने की आशंका है।
दरअसल, प्रदेशभर के सफाई कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि नगरीय निकायों में ठेका और आउटसोर्स व्यवस्था खत्म की जाए, कर्मचारियों को नियमित किया जाए और न्यूनतम 25 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, इसलिए उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करनी पड़ी है।
सफाई कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष मगन झंझोट के मुताबिक, प्रदेशभर में करीब ढाई लाख सफाई कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं। उनका दावा है कि मध्य प्रदेश के 16 नगर निगमों में से 14 में हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। हालांकि इंदौर और उज्जैन में आंदोलन की स्थिति अलग बताई गई है।
रोजाना 850 टन कचरा उठाने की व्यवस्था प्रभावित
भोपाल में प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। नगर निगम की गाड़ियां घरों और व्यावसायिक क्षेत्रों से कचरा एकत्र कर निर्धारित स्थानों तक पहुंचाती हैं। लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के कारण यह पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई इलाकों में कचरा समय पर नहीं उठने से सड़कों और खाली स्थानों पर ढेर लगने लगे हैं। इससे स्थानीय रहवासियों को परेशानी हो रही है।
दीपावली जैसे बड़े त्योहार से पहले सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। त्योहार के दौरान बाजारों और कॉलोनियों में साफ-सफाई की जरूरत अधिक रहती है, ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर स्थिति और बिगड़ सकती है।
अधिकारियों से बातचीत में नहीं निकला समाधान
हड़ताल खत्म कराने के लिए गुरुवार को नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत हुई, लेकिन बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधे बातचीत करने की बात कही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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पानी की सप्लाई रोकने की चेतावनी से बढ़ी चिंता
सफाई व्यवस्था के बाद अब जलप्रदाय व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी सामने आ गई है। कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी है। यदि ऐसा होता है तो राजधानी के लाखों लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है। हालांकि फिलहाल यह कर्मचारियों की ओर से दी गई चेतावनी है।
अब नगर निगम प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ शहर में जमा हो रहे कचरे को हटाकर सफाई व्यवस्था बहाल करना है, वहीं दूसरी तरफ पानी की सप्लाई बाधित होने से रोकना भी जरूरी है। ऐसे में सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है। सवाल यह है कि दीपावली से पहले हड़ताल खत्म होगी या भोपाल के लोगों को सफाई और पानी, दोनों समस्याओं का सामना करना पड़ेगा?

