तेहरान: वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को दोबारा सुचारु रूप से खोलने के लिए ईरान और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। सबसे अहम बात यह है कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का टोल या ट्रांजिट शुल्क लगाने का प्रावधान नहीं रखा गया है। यदि यह समझौता लागू होता है, तो भारत सहित उन देशों को बड़ी राहत मिल सकती है, जिनका व्यापार और ऊर्जा आयात इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है।
बिना टोल होगा समुद्री आवागमन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्ताव के तहत जहाज फारस की खाड़ी में प्रवेश ईरान के नियंत्रण वाले समुद्री मार्ग से करेंगे, जबकि बाहर निकलने के लिए ओमान के नियंत्रण वाले मार्ग का उपयोग करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री आवाजाही को सुरक्षित और निर्बाध बनाना है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
बता दें भारत अपने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में यदि होर्मुज स्ट्रेट बिना अतिरिक्त शुल्क और बाधाओं के खुलता है, तो ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक लागत और सप्लाई चेन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी टिकी नजर
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावना भी बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम समझौता अमेरिका की नीतियों और ईरान के बंदरगाहों से जुड़े प्रतिबंधों पर निर्भर करेगा।
रणनीतिक महत्व बरकरार
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी रास्ते से होता था। ऐसे में इस मार्ग का दोबारा सामान्य होना वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

