UP कफ सिरप केस: ED की छापेमारी में बड़ा खुलासा, 700 से अधिक फर्जी फर्में

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चर्चित नशीले कफ सिरप तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। तीन राज्यों में करीब 40 घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान सामने आया है कि 220 संचालकों के नाम पर 700 से अधिक फर्जी फर्में खड़ी की गई थीं।

कागजों पर चल रही थीं सैकड़ों फर्में

ED को मिले साक्ष्यों के अनुसार, इन फर्मों के जरिए अरबों रुपये की अवैध कमाई की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकांश फर्में केवल कागजों में ही मौजूद थीं, जबकि कई फर्मों में दिखाए गए अधिकृत व्यक्ति भी सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित पाए गए।

संपत्ति जब्ती की तैयारी

प्रवर्तन निदेशालय ने संकेत दिए हैं कि साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही संपत्ति जब्ती की कार्रवाई शुरू की जाएगी। फिलहाल कई अन्य फर्मों और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

बर्खास्त सिपाही और सहयोगी जेल भेजे गए

नशीले कफ सिरप की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और अमित सिंह उर्फ टाटा की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पूछताछ में कई नाम उजागर

ED की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि विकास सिंह नरवे ने ही उन्हें शुभम जायसवाल समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई तस्करों से मिलवाया था। शुरुआत में शुभम जायसवाल ने ज्यादा मुनाफे का लालच देकर उन्हें इस अवैध कारोबार में शामिल किया।

काली कमाई से ऐशो-आराम और चुनावी खर्च

बाद में आरोपियों को पता चला कि कफ सिरप की बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है, जिसमें कई गुना मुनाफा मिलता है। इसके बाद उन्होंने खुद कारोबार की कमान संभाल ली और तस्करी से हुई काली कमाई का डायवर्जन शुरू कर दिया।
जांच में खुलासा हुआ है कि इसी रकम से आलोक सिंह ने आलीशान मकान बनवाया, जबकि अमित सिंह ‘टाटा’ ब्लॉक प्रमुख बनने के लिए अंधाधुंध खर्च कर रहा था।