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ब्राजील में लूला की चौथी जीत: पहले दौर में पिछड़कर रचा इतिहास, बोल्सोनारो के बेटे को हराया

ब्राजीलिया। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाने से लेकर दोबारा सत्ता में लौटने तक उन्होंने लंबी राजनीतिक लड़ाई लड़ी है। चुनाव से जुड़े उपलब्ध विवरण के मुताबिक, लूला ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। पहले दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ने के बाद उन्होंने दूसरे दौर में बाजी पलट दी। हालांकि, इस चुनाव परिणाम की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

पहले दौर में पिछड़े, दूसरे में पलटी बाजी

दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पहले दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47 प्रतिशत, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण में किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वैध मत नहीं मिलने पर शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का मतदान होता है। इसमें सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति बनता है।

जायर बोल्सोनारो को भी हरा चुके हैं लूला

फ्लावियो बोल्सोनारो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। बोल्सोनारो परिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है। लूला ने वर्ष 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में जायर बोल्सोनारो को हराया था। उस चुनाव के दूसरे दौर में लूला को 50.90 प्रतिशत और जायर बोल्सोनारो को 49.10 प्रतिशत वोट मिले थे।

जेल जाने के बाद फिर सत्ता तक पहुंचे

लूला वर्ष 2003 से 2010 तक लगातार दो कार्यकाल ब्राजील के राष्ट्रपति रहे। वर्ष 2018 में भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था। बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई, जिससे उनकी राजनीतिक वापसी का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2022 का राष्ट्रपति चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी की।

महिला और कैथोलिक मतदाताओं का समर्थन

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के हवाले से दावा किया गया कि 49 प्रतिशत महिलाओं ने लूला का समर्थन किया, जबकि फ्लावियो को 40 प्रतिशत महिलाओं का समर्थन मिला। कैथोलिक मतदाताओं में लूला का समर्थन 52 प्रतिशत और फ्लावियो का 42 प्रतिशत बताया गया। लूला ने ब्राजील की स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देते हुए कहा कि देश को अपने फैसले खुद लेने चाहिए।

संसद में विपक्ष बन सकता है चुनौती

राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बावजूद लूला के लिए सरकार चलाना आसान नहीं होगा। ब्राजील की संसद में दक्षिणपंथी दलों की मजबूत स्थिति सरकार के लिए चुनौती बन सकती है। जायर बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी और उसके सहयोगियों को बड़ी संख्या में सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में सरकारी खर्च, गरीबों के लिए सहायता योजनाओं और चुनावी वादों को पूरा करने के लिए लूला को दूसरी पार्टियों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।

 

 

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