नई दिल्ली: रक्षाबंधन को लेकर देशभर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। इस बार केवल राखियों का कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से लगभग 45 प्रतिशत अधिक है। उपहार, मिठाई, कपड़े और अन्य उत्पादों को मिलाकर कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
कैट के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर के अनुसार, पिछले वर्ष राखी कारोबार करीब 17 हजार करोड़ रुपये का था, जबकि 2023 में यह 12 हजार करोड़ रुपये रहा था।
स्वदेशी राखियों की बढ़ी मांग
‘वोकल फॉर लोकल’ के बढ़ते प्रभाव से स्वदेशी राखियों की मांग बढ़ी है, जिससे महिला उद्यमियों, स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बच्चों के बीच लाइट और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां भी लोकप्रिय हैं।
स्टॉक और नए ट्रेंड की चुनौती
व्यापारियों का कहना है कि राखी का कारोबार सीमित समय का होता है। ज्यादा स्टॉक बचने पर अगले साल डिजाइन और ट्रेंड बदलने से नुकसान हो सकता है। वहीं, इस बार सोने-चांदी की हल्की राखियों की मांग भी बढ़ी है, जिन्हें बाद में आभूषण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कारोबारियों को उम्मीद है कि रक्षाबंधन से पहले अंतिम दिनों में खरीदारी और तेज होगी।

