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500 करोड़ के रक्षा सौदे की गोपनीय जानकारी लीक, सीबीआई ने तीन को दबोचा

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय की कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) में कथित रिश्वतखोरी और गोपनीय जानकारी लीक करने के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने कंपनी के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार, निजी कंपनी एसएमपीपी लिमिटेड के सीईओ एवं निदेशक आशीष कंसल और अनिल कुमार के भाई बी. हर्षवर्धन को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 500 करोड़ रुपये के रक्षा आपूर्ति सौदे से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां लीक की गईं और सरकारी कामकाज में अनुकूल फैसले कराने के बदले रिश्वत मांगी गई।

सीबीआई ने आरोपियों के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी के दौरान करीब 2.23 करोड़ रुपये नकद और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। एजेंसी के मुताबिक, 12 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया था और अगले दिन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

ठेकदारों से मिलीभगत का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, पुणे स्थित म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक के पद पर तैनात अनिल कुमार कुछ निजी ठेकेदारों के साथ कथित तौर पर मिलीभगत कर रहे थे। उन पर सरकारी कामकाज में अनुकूल निर्णय और सुविधाएं उपलब्ध कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। इसके अलावा, रक्षा उत्पादन, खरीद प्रक्रिया और अन्य रणनीतिक रूप से संवेदनशील जानकारियां लीक करने का भी आरोप लगाया गया है।

पुणे से 1.73 करोड़ रुपये बरामद

सीबीआई ने अनिल कुमार के पुणे स्थित परिसरों की तलाशी के दौरान 1.73 करोड़ रुपये नकद बरामद किए। वहीं, मैसूर, बेंगलुरु और दिल्ली में आरोपियों के ठिकानों से करीब 50 लाख रुपये और कुछ दस्तावेज मिले। इस तरह बरामद नकदी की कुल राशि लगभग 2.23 करोड़ रुपये बताई गई है।

कारतूस और गोला-बारूद बनाती है कंपनी

म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड का मुख्यालय पुणे के खड़की क्षेत्र में है। कंपनी छोटे हथियारों के कारतूस, तोपों के लिए गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपयोग की सामग्री का निर्माण करती है। ऐसे में कंपनी से जुड़ी रणनीतिक सूचनाओं के कथित तौर पर लीक होने का मामला रक्षा खरीद और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वहीं, आशीष कंसल की कंपनी एसएमपीपी लिमिटेड सेना के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट की आपूर्ति कर चुकी है। कंपनी गोला-बारूद और कामिकाजे ड्रोन जैसे रक्षा उपकरणों के निर्माण से भी जुड़ी है। मामले में सीबीआई की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।

 

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