इस्लामाबाद। दुनिया की नजरें इस वक्त पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता होने जा रही है। इस बातचीत को मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच ‘डिसाइडिंग मोमेंट’ माना जा रहा है, जो यह तय कर सकता है कि हालात कूटनीति से संभलेंगे या टकराव और गहराएगा।
पाकिस्तान निभा रहा ‘मध्यस्थ’ की अहम भूमिका
जानकारी के अनुसार, इस संवेदनशील वार्ता में पाकिस्तान न सिर्फ मेजबान है, बल्कि एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर समेत शीर्ष नेतृत्व इस पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर कर रहा है। पाकिस्तान की कोशिश है कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका मजबूत होकर उभरे।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल एक ही होटल में मौजूद रहेंगे, लेकिन सीधे आमने-सामने बातचीत नहीं करेंगे। ‘प्रॉक्सिमिटी टॉक्स’ के जरिए पाकिस्तानी अधिकारी संदेशों का आदान-प्रदान कराएंगे। यह तरीका तब अपनाया जाता है जब दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी होती है।
कौन-कौन शामिल
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में उच्चस्तरीय टीम पहुंची है, जबकि ईरान की तरफ से वरिष्ठ कूटनीतिक और सुरक्षा अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। बातचीत के केंद्र में लेबनान में सीजफायर, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और भविष्य में सैन्य कार्रवाई पर रोक जैसे बड़े मुद्दे हैं।
ट्रंप के बयान से बढ़ी तल्खी
बता दें वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि समझौता नहीं होता, तो सैन्य विकल्प फिर से सक्रिय हो सकता है। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को हर हाल में खोला जाएगा, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
इस बैठक के नतीजों का असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, व्यापारिक मार्गों और सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ेगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का अहम मार्ग है, इसलिए इसकी स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह बातचीत किसी ठोस समझौते में बदलेगी या फिर यह एक और असफल कूटनीतिक प्रयास साबित होगी। अगले कुछ घंटे वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

