भोपाल: मध्यप्रदेश में आईपीएस कैडर रिव्यू में हो रही देरी अब राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। तय समय पर कैडर की समीक्षा नहीं होने से कई अधिकारियों के आईपीएस बनने के अवसर प्रभावित होने की बात सामने आई है। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 2000 से 2025 के बीच छह बार कैडर रिव्यू होना था, लेकिन इस दौरान केवल चार बार ही समीक्षा हो सकी। वर्ष 2025 का कैडर रिव्यू भी अब तक पूरा नहीं हुआ है।
छह बार होनी थी समीक्षा, चार बार ही हुई
दस्तावेजों के अनुसार, आईपीएस कैडर रिव्यू वर्ष 2000, 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 में होना निर्धारित था। इसके मुकाबले समीक्षा वर्ष 2003, 2008, 2015 और 2022 में ही की गई। वर्ष 2010 में समीक्षा नहीं हो सकी, जबकि 2025 का रिव्यू अभी भी लंबित है। इससे कैडर की समीक्षा के लिए तय समय का पालन नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
1998 बैच के अधिकारियों को नुकसान होने का दावा
कैडर रिव्यू में देरी का असर राज्य पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों पर पड़ने की आशंका जताई गई है। इनमें 1998 बैच के संदीप मिश्रा, सत्येंद्र सिंह तोमर, अनिल कुमार पाटीदार, मुकेश कुमार वैश्य और जितेंद्र सिंह के नाम सामने आए हैं।
दस्तावेजों में दावा किया गया है कि 56 वर्ष की आयु सीमा के कारण कुछ अधिकारी अब आईपीएस में पदोन्नति की पात्रता से बाहर हो गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कैडर रिव्यू समय पर होता तो क्या इन अधिकारियों को आईपीएस बनने का अवसर मिल सकता था।
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2026 की डीपीसी में पद शामिल करने की मांग
इस मामले में कैडर रिव्यू के आधार वर्ष की गणना पर भी सवाल उठाए गए हैं। मांग की गई है कि वर्ष 2025 की लंबित समीक्षा से संबंधित पदों को 2026 की विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि पात्र अधिकारियों को पदोन्नति का अवसर मिल सके।
इसके साथ ही समीक्षा में देरी के कारणों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की बात भी कही गई है। हालांकि, इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से देरी का आधिकारिक कारण और मांगों पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं हुआ है।

