बालाघाट: जिले के आदिवासी एवं विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) बैगा समुदाय से जुड़े दो गंभीर मामलों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और घटनाओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया है।
ज्ञापन में बताया गया कि तहसील बिरसा के ग्राम अडोरी, बाँदारी, कुंडेकसा, कोरका एवं सोनेवानी (मोहनपुर) में संक्रामक बीमारियों के कारण 29 बैगा बच्चों की मृत्यु की घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। वहीं, कान्हा-किसली राष्ट्रीय उद्यान से लगे परसवाड़ा तहसील के ग्राम पर्रापुर, शैला एवं मालखेड़ी में वन्यजीव के हमले में तीन महिलाओं की मृत्यु का मामला भी उठाया गया है।
ज्ञापन के अनुसार दोनों घटनाओं में प्रभावित परिवार विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय से संबंधित हैं। इन घटनाओं के कारण मृतकों के परिवारों को अपूरणीय क्षति हुई है तथा क्षेत्र के बैगा परिवारों में भय, असुरक्षा और शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है।
प्रत्येक मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग
राष्ट्रपति के नाम भेजे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि संक्रामक बीमारियों से मृत 29 बच्चों के प्रत्येक परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अथवा मुआवजा दिया जाए। इसी प्रकार वन्यजीव के हमले में मृत तीन महिलाओं के आश्रित परिवारों को भी 50-50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाए।
CBI जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में दोनों घटनाओं की परिस्थितियों, प्रशासनिक लापरवाही, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्थाओं तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की CBI से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, संस्था अथवा अन्य व्यक्ति की लापरवाही या दोष सामने आने पर उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक एवं वैधानिक कार्रवाई किए जाने की मांग रखी गई है।
प्रभावित गांवों में तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग
बच्चों की मौत के मामले में प्रभावित ग्रामों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच कराने के साथ ही तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाने, पर्याप्त चिकित्सकीय दल एवं आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था
कान्हा-किसली राष्ट्रीय उद्यान से लगे बैगा बाहुल्य गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन विभाग की प्रभावी गश्त, चेतावनी प्रणाली और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए स्थायी उपाय किए जाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, आजीविका और बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष पैकेज देने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और उसके क्रियान्वयन की उच्चस्तरीय निगरानी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
ज्ञापनकर्ताओं ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि बैगा समुदाय से जुड़ी इन गंभीर घटनाओं को मानवीय एवं संवेदनशील दृष्टिकोण से लेते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय, पर्याप्त आर्थिक सहायता तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।



