गंगटोक: सिक्किम को नया राज्यपाल मिल गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने सोमवार को गंगटोक स्थित लोक भवन में राज्य के 21वें राज्यपाल के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ए. मुहम्मद मुस्ताक ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
दुष्यंत कुमार गौतम को 12 अक्टूबर 2026 को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। वे लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं और संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं।
नगर पार्षद से राज्यपाल तक का राजनीतिक सफर
दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत दिल्ली की स्थानीय राजनीति से की थी। वर्ष 1997 से 2002 के बीच उन्होंने नगर पार्षद के रूप में काम किया। इसके बाद भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ी और उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
वे भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा से भी जुड़े रहे। संगठन में काम करते हुए उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया।
मार्च 2020 में दुष्यंत गौतम हरियाणा से राज्यसभा के लिए चुने गए थे। उनका कार्यकाल अगस्त 2022 तक रहा। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार के रूप में भाग लिया था, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली।
नियुक्ति को लेकर भी उठे सवाल?
दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति के बाद उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवाद को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
अंकिता भंडारी के परिवार ने इस मामले में कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति रोकने की मांग की थी। वहीं, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई है।
हालांकि, ये आरोप और जांच से जुड़ी मांगें हैं। इन्हें किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
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राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी
राज्यपाल बनने के साथ ही दुष्यंत कुमार गौतम ने सक्रिय दलगत राजनीति से अलग एक संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभाली है। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका संविधान के अनुसार राज्य सरकार और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाए रखने की होगी।
सिक्किम जैसे सीमावर्ती राज्य में राज्यपाल का पद प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। अब दुष्यंत कुमार गौतम के सामने इस जिम्मेदारी को निभाने और राज्य की संवैधानिक व्यवस्था में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने की चुनौती होगी।

