इंदौर में 75 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या के मामले में उनकी 20 वर्षीय पोती की गिरफ्तारी ने परिवार और रिश्तों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इसलिए और संवेदनशील है क्योंकि पूछताछ में युवती ने अपने दादा पर दुष्कर्म और अश्लील हरकतों के आरोप लगाए हैं। पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है। इन आरोपों की सच्चाई जांच और साक्ष्यों से ही सामने आएगी, इसलिए फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। परिवार को समाज की सबसे सुरक्षित इकाई माना जाता है। बच्चे हों या बुजुर्ग, घर से ही सुरक्षा, अपनापन और भरोसे की उम्मीद की जाती है। लेकिन जब इसी चौखट के भीतर हत्या जैसे अपराध और यौन उत्पीड़न के आरोप सामने आएं तो सवाल सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं रह जाता। यह रिश्तों में आई दरार और परिवार के भीतर संवाद की कमी की ओर भी संकेत करता है।
ऐसी घटनाओं के बाद बच्चों के संस्कार पर सवाल उठाना आसान है। मगर हर मामले को संस्कारों की कमी बताकर आगे बढ़ जाना समस्या की जड़ से आंखें मूंदना है। परिवार में अनुशासन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी विश्वास और संवाद भी है। बच्चों को यह भरोसा होना चाहिए कि वे किसी अनुचित व्यवहार, भय या परेशानी के बारे में बिना झिझक अपनी बात कह सकें। उनकी बात को गंभीरता से सुनना और जरूरत पड़ने पर समय रहते उचित मदद लेना परिवार की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा भी परिवार की जिम्मेदारी है। किसी आरोप को केवल रिश्ते के आधार पर न खारिज किया जा सकता है और न सच माना जा सकता है। इसलिए इस मामले में हत्या के साथ युवती के आरोपों की भी निष्पक्ष और संवेदनशील जांच जरूरी है।
इंदौर की घटना को केवल सनसनीखेज अपराध मानकर भूल जाना आसान होगा, लेकिन इससे समाज को एक गंभीर चेतावनी मिलती है। रिश्ते केवल साथ रहने से नहीं बनते, वे भरोसे, सम्मान और संवाद से टिकते हैं। घर की दीवारें तभी सुरक्षा देती हैं, जब उनके भीतर रहने वाले एक-दूसरे की बात सुनने और समझने के लिए तैयार हों। उनमें प्रेम और सम्मान की मर्यादा कायम हो।
-मिलिंद ठाकरे

