संक्रमण के बढ़ते लक्षण बुखार, खांसी, दस्त या सांस लेने में परेशानी होने पर केवल लक्षण देखकर दवा देने की प्रक्रिया में आने वाले समय में बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने संक्रमण की पहचान को इलाज का अहम आधार बनाने की दिशा में एक नई पहल की है। इसके तहत मरीज के लक्षणों के साथ यह पता लगाने पर जोर दिया जाएगा कि बीमारी के पीछे कौन-सा वायरस, बैक्टीरिया या अन्य रोगजनक जिम्मेदार है।
इस पहल का मकसद बिना जरूरत दवाओं और खासतौर पर एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को कम करना है। कई संक्रमणों में लक्षण एक जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन उनका कारण अलग हो सकता है। ऐसे में जांच के आधार पर उपचार करने से गलत या अनावश्यक दवा दिए जाने की संभावना कम हो सकती है।
233 रोगजनकों की तैयार की गई सूची
ICMR ने संक्रमणों की पहचान में डॉक्टरों और लैब विशेषज्ञों की मदद के लिए 233 रोगजनकों को अलग-अलग प्राथमिकता श्रेणियों में रखा है। इस सूची को तैयार करने के दौरान देश-विदेश के चिकित्सकों, प्रयोगशाला विशेषज्ञों और महामारी विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के साथ व्यापक चर्चा की गई।
इसका उद्देश्य यह तय करने में मदद करना है कि किसी खास लक्षण या लक्षणों के समूह के सामने आने पर किन संक्रमणों की जांच को पहले प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अचानक बुखार में इन संक्रमणों पर नजर
नई गाइडलाइन में अचानक या बिना स्पष्ट कारण के आने वाले बुखार को भी प्रमुखता दी गई है। इसमें 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और 14 दिन या उससे कम अवधि वाले बुखार को शामिल किया गया है।
ऐसे मामलों में मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और पैराटाइफाइड समेत कई संभावित संक्रमणों की जांच को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
बुखार के साथ दाने तो बदल जाएगी जांच की दिशा
अगर बुखार के साथ शरीर पर दाने भी दिखाई देते हैं, तो संभावित संक्रमणों की सूची अलग हो सकती है। ऐसे मरीजों में खसरा, रूबेला, डेंगू, चिकनपॉक्स, हर्पीज, जीका और एंटरोवायरस जैसे संक्रमणों पर ध्यान दिया जा सकता है।
यानी केवल ‘बुखार’ देखकर एक जैसी दवा देने के बजाय लक्षणों के संयोजन के आधार पर संभावित संक्रमण की पहचान करने पर जोर रहेगा।
सूजन या दिमागी लक्षणों में भी अलग जांच
बुखार के साथ गर्दन या शरीर के अन्य हिस्सों में लसीका ग्रंथियों की सूजन होने पर एपस्टीन-बार वायरस, साइटोमेगालोवायरस, स्क्रब टाइफस, ब्रुसेला और मेलियोइडोसिस जैसे संक्रमणों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।
वहीं, बुखार के साथ भ्रम, बेहोशी या दिमाग से जुड़े गंभीर लक्षण होने पर मलेरिया, स्क्रब टाइफस और रिकेट्सियल संक्रमणों की जांच को प्राथमिकता दी जा सकती है।
प्राथमिकता के हिसाब से बांटे गए संक्रमण
ICMR ने रोगजनकों को 1A, 1B, 2 और 3 जैसी श्रेणियों में बांटा है। प्राथमिकता 1A में ऐसे संक्रमणों को रखा गया है, जिनकी समय पर पहचान इलाज शुरू करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। अन्य श्रेणियों में अपेक्षाकृत दुर्लभ या विशेष निगरानी वाले संक्रमण शामिल हैं।
इस पहल से डॉक्टरों को संभावित संक्रमण की दिशा में जांच चुनने में मदद मिल सकती है और मरीजों को अनावश्यक दवाओं से बचाने की कोशिश की जा सकेगी। हालांकि, किसी भी मरीज के लिए जांच और इलाज का फैसला चिकित्सक ही उसकी स्थिति के अनुसार करेंगे।

