परिंदा जो क्रांतिवीर बना: नाना पाटेकर के वो 10 किरदार, जिन्हें भुलाना मुश्किल दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से उन्होंने अंतिम सांस ली। करीब पांच दशक लंबे फिल्मी सफर में नाना ने ऐसे कई किरदार निभाए, जिन्होंने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे अलग और प्रभावशाली अभिनेताओं में शामिल किया। ‘परिंदा’ के खतरनाक अन्ना से लेकर ‘क्रांतिवीर’ के प्रताप नारायण तिलक तक, उनके कई किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में हैं।
‘गमन’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर
नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘आज की आवाज’, ‘परिंदा’ और ‘एंगर’ जैसी फिल्मों में काम किया। ‘अग्निसाक्षी’ से उन्हें खास पहचान मिली। करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी, तमिल और कन्नड़ फिल्मों में भी अभिनय किया।
‘परिंदा’ में बने खतरनाक अन्ना
1989 में आई ‘परिंदा’ नाना पाटेकर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है। इसमें उन्होंने अन्ना नाम के खतरनाक डॉन का किरदार निभाया। इस भूमिका में उनकी अदाकारी को खूब सराहा गया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
‘तिरंगा’ में पुलिस अधिकारी की भूमिका

1993 की फिल्म ‘तिरंगा’ में नाना पाटेकर ने इंस्पेक्टर शिवाजीराव वाघले का किरदार निभाया। एक सख्त और कड़क पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी भूमिका को दर्शकों ने खूब पसंद किया।
‘क्रांतिवीर’ में उठाई व्यवस्था के खिलाफ आवाज

1994 में आई ‘क्रांतिवीर’ में नाना ने प्रताप नारायण तिलक की भूमिका निभाई। उनका किरदार भ्रष्ट व्यवस्था, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक ताकतों के खिलाफ आवाज उठाता है। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
‘अग्निसाक्षी’ में दिखा खौफनाक रूप
‘अग्निसाक्षी’ में नाना पाटेकर ने विश्वनाथ की भूमिका निभाई थी। फिल्म में वह एक हिंसक और सनकी पति के रूप में नजर आए। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
‘अब तक छप्पन’ में बने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट
2004 की फिल्म ‘अब तक छप्पन’ में नाना ने मुंबई पुलिस के एनकाउंटर दल के अनुभवी अधिकारी इंस्पेक्टर साधु आगाशे का किरदार निभाया। यह भूमिका पुलिस अधिकारी दया नायक से प्रेरित थी।
‘अपहरण’ में बने भ्रष्ट नेता
2005 में आई ‘अपहरण’ में नाना ने तबरेज आलम का किरदार निभाया। फिल्म में वह बिहार की पृष्ठभूमि में एक प्रभावशाली और भ्रष्ट नेता की भूमिका में नजर आए।
‘वेलकम’ में खतरनाक डॉन का मजेदार अंदाज
2007 की कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम’ में नाना ने उदय शंकर शेट्टी का किरदार निभाया। वह खूंखार लेकिन मजाकिया डॉन के रूप में नजर आए। यह भूमिका उनके गंभीर किरदारों से बिल्कुल अलग थी।
‘राजनीति’ में बने परिवार के मार्गदर्शक
2010 में आई प्रकाश झा की फिल्म ‘राजनीति’ में नाना ने बृज गोपाल की भूमिका निभाई। वह फिल्म के प्रमुख राजनीतिक परिवार के मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में नजर आए।
‘नटसम्राट’ में दिखाया अकेलेपन का दर्द
2016 की मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में नाना ने गणपतराव ‘अप्पा’ बेलवलकर का किरदार निभाया। कभी मशहूर अभिनेता रहे इस किरदार को बुढ़ापे में परिवार की उपेक्षा और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है।
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‘वनवास’ और ‘ओ रोमियो’ तक जारी रहा सफर
‘वनवास’ में नाना ने दीपक त्यागी यानी प्रताप सिंघाना का किरदार निभाया था। यह किरदार भूलने की बीमारी से जूझता है। स्रोत के अनुसार, उनकी आखिरी फिल्म ‘ओ रोमियो’ थी, जिसमें उन्होंने डीएसपी इस्माइल खान की भूमिका निभाई।

