चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में 2026 ने एक नया अध्याय खोल दिया है। साउथ के सुपरस्टार विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के साथ पहली ही बार चुनाव लड़ते हुए 234 में से 107 सीटें जीतकर सियासी भूचाल ला दिया। यह प्रदर्शन न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि राज्य की पारंपरिक राजनीति को पूरी तरह रीसेट करने वाला माना जा रहा है।
पांच दशक बाद दोहराया गया इतिहास
विजय की यह जीत सीधे तौर पर एम.जी. रामचंद्रन (MGR) के दौर की याद दिलाती है, जब 1977 में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़कर 130 सीटें जीती थीं। विजय का उभार भी उसी तरह आउटसाइडर से पावर सेंटर बनने की कहानी को दोहराता दिख रहा है।
TVK vs DMK
बता दें इस चुनाव में विजय ने साफ तौर पर मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के साथ बताया और नतीजों ने इसे सही साबित कर दिया। दशकों से तमिलनाडु की राजनीति पर कब्जा रखने वाली DMK और अन्नाद्रमुक (AIADMK) दोनों को इस बार करारा झटका लगा।
बिना रैलियों के बना कनेक्शन
विजय का चुनावी अभियान पूरी तरह अलग था- न बड़े रोड शो, न लगातार रैलियां, न पारंपरिक इंटरव्यू। इसके बजाय उन्होंने डिजिटल कम्युनिकेशन, फैन नेटवर्क और सोशल मीडिया के जरिए सीधा कनेक्शन बनाया। उनका मैसेज वायरल मैकेनिज्म के जरिए घर-घर तक पहुंचा।
एक दिलचस्प रणनीति के तहत विजय ने युवाओं और बच्चों को टार्गेट किया। कुट्टी, नानबा, नानबी जैसे संबोधनों के जरिए उन्होंने भावनात्मक कनेक्ट बनाया, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से परिवारों के वोटिंग पैटर्न पर असर पड़ा। 85% से ज्यादा मतदान प्रतिशत इसी हाई एंगेजमेंट का संकेत माना जा रहा है।
विजय ने अपनी पार्टी की विचारधारा में द्रविड़ राजनीति और तमिल राष्ट्रवाद का बैलेंस बनाया। यह हाइब्रिड पॉलिटिकल मॉडल युवा वोटर्स और पारंपरिक समर्थकों दोनों को आकर्षित करने में सफल रहा।
स्टार पावर से पॉलिटिकल ब्रांडिंग तक
जानकारी के मुताबिक, फिल्मी करियर में इलैया थलापति से थलापति बनने तक विजय ने अपनी इमेज को एक लीडर के रूप में तैयार किया। उनकी फिल्मों जैसे कथी, मर्सल, सरकार में सामाजिक और राजनीतिक मैसेज साफ दिखाई देने लगे थे, जो आगे चलकर उनकी राजनीतिक पहचान का आधार बने।
विजय का फैन क्लब नेटवर्क विजय मक्कल इयक्कम (VMI) पहले से ही जमीनी स्तर पर सक्रिय था। 2021 के स्थानीय चुनावों में इस नेटवर्क ने अपनी ताकत दिखाई, जिसे बाद में TVK के स्ट्रक्चर में बदल दिया गया यानी फैन बेस सीधे वोट बैंक में कन्वर्ट हुआ।
विजय ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और कम बोलकर ज्यादा असर पैदा किया। उनके छोटे-छोटे सार्वजनिक संदेश, स्टोरीटेलिंग स्टाइल और सिंपल लेकिन गहरे संवाद, इन सबने उन्हें जनता से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
संघर्ष से शिखर तक
1984 में बाल कलाकार के रूप में शुरुआत करने वाले विजय ने कई उतार-चढ़ाव देखे। शुरुआती असफलताओं के बाद उन्होंने खुद को एक मेगास्टार के रूप में स्थापित किया और अब उसी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदल दिया।
विजय की इस जीत ने साफ कर दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति अब सिर्फ दो दलों तक सीमित नहीं रही। TVK के उभार ने एक नया पावर सेंटर बना दिया है, जो आने वाले वर्षों में राज्य की सियासत की दिशा तय कर सकता है।

