रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के पुराने फैसले को पलटते हुए उन्हें हत्या की साजिश समेत कई गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया।
किन धाराओं में हुई सजा
बता दें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान अमित जोगी को IPC की धारा 120-बी (षड्यंत्र), 302/34 (हत्या) और 427/34 (नुकसान पहुंचाना) के तहत दोषी माना। यह फैसला CBI की अपील और पीड़ित पक्ष की याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई के बाद आया।
2003 का चर्चित मर्डर केस
जानकारी के मुताबिक,यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज केस में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से कुछ सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि 28 आरोपियों को सजा हुई थी। उस समय अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।
कैसे पलटा पूरा केस
पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी और CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामला दोबारा हाईकोर्ट में सुना गया। वकीलों ने दलील दी कि जिन सबूतों के आधार पर अन्य आरोपियों को सजा दी गई, वही सबूत अमित जोगी के मामले में नजरअंदाज किए गए थे।
CBI जांच में सामने आई साजिश
जिसके बाद शुरुआत में पुलिस ने इस केस को लूट का मामला बताया था, लेकिन बाद में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद इसे CBI को सौंप दिया गया। जांच में सामने आया कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका बताई गई।

