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भोपाल में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, पीड़िता को मिलेगा 4 लाख रुपये का मुआवजा

भोपाल: राजधानी भोपाल में नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी सुधांशु वर्मा को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता को 4 लाख रुपये का प्रतिकर प्रदान करने का आदेश भी दिया है।

यह फैसला 15 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायाधीश मनोहरलाल पाटीदार की अदालत ने सुनाया। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अजय शंकर प्रजापति और ज्योति कुजूर ने पैरवी की।

मिलने के बहाने बुलाकर होटल ले गया था आरोपी

अभियोजन के मुताबिक, ये घटना 17 मई 2021 की है। नाबालिग लड़की के माता-पिता ने जहांगीराबाद थाने में जाकर अपनी बेटी के गायब होने की रिपोर्ट लिखवाई थी। घरवालों ने आस-पड़ोस और रिश्तेदारों में काफी तलाश की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। शिकायत के बाद पुलिस ने गुमशुदगी क्रमांक 32/2021 दर्ज कर जांच शुरू कर दी। अगले ही दिन 18 मई को पुलिस ने लड़की को भोपाल के घोड़ा निकास इलाके से ढूंढ निकाला।

पुलिस को दिए बयान में पीड़िता ने बताया कि वह आरोपी सुधांशु को करीब चार साल से जानती थी और दोनों फोन पर बात करते थे। घटना वाले दिन आरोपी ने उसे फोन करके मिलने के लिए बुलाया था। पीड़िता ने बताया कि मिलने के बाद आरोपी उसे होटल ले जाने की जिद करने लगा और जबरदस्ती होटल ले गया, जहां उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ गलत काम किया गया।

पुलिस जांच के बाद अदालत में पेश हुआ मामला

पीड़िता के बयान के आधार पर गोविंदपुरा पुलिस ने अपराध क्रमांक 431/2021 दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज किया।

पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य, दस्तावेज और कानूनी तर्क अदालत के सामने रखे।

अदालत ने सुनाई सजा, लगाया अर्थदंड

अदालत ने सबूतों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपी सुधांशु वर्मा को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत 10 साल की सख्त सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा धारा 366 के तहत भी 2 साल की सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई।

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पीड़िता को 4 लाख रुपये का प्रतिकर देने का आदेश

इस केस की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पीड़िता को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।विशेष लोक अभियोजक अजय शंकर प्रजापति ने बताया कि अदालत ने अभियोजन पक्ष के सारे सबूत, दलीलें और दस्तावेजों को सही मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है।

करीब पांच साल पुराने इस मामले में आए फैसले से पीड़िता को आखिरकार न्याय मिल गया है। ये फैसला बताता है कि नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों में कानून कितनी सख्ती से काम करता है।

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