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एआई से रक्षा तक बढ़ी भारत-जापान की दोस्ती, दोनों देशों ने किए कई अहम समझौते

नई दिल्ली। भारत और जापान ने रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, ऊर्जा, आर्थिक सुरक्षा, नई तकनीक और निवेश समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने भविष्य की साझेदारी को मजबूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं कीं।

प्रधानमंत्री ताकाइची की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के लिए संयुक्त रोडमैप तैयार करने, हरित ऊर्जा परियोजनाओं को गति देने और रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया। दोनों नेताओं ने इस साझेदारी को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

एआई और नई तकनीक में बढ़ेगा सहयोग

बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जापान की अत्याधुनिक तकनीक और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता मिलकर वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास को नई दिशा देंगी। दोनों देशों ने डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।

रक्षा क्षेत्र में पहली सह-विकास परियोजना

भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में अपनी पहली संयुक्त सह-विकास (Co-development) परियोजना पर समझौता किया। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के विकास, तकनीकी सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया। यह समझौता क्वाड (Quad) देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन अमोनिया परियोजना पर बड़ा कदम

ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों ने लगभग चार लाख टन वार्षिक क्षमता वाली ग्रीन अमोनिया उत्पादन परियोजना विकसित करने की घोषणा की। जापान ने इसे ऊर्जा सुरक्षा सहयोग में नया मील का पत्थर बताया।

इसके साथ ही पेट्रोलियम भंडारण, स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भी कई नई पहल पर सहमति बनी।

129 निजी समझौते, 2 ट्रिलियन येन से अधिक का निवेश

भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बताया कि दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच 129 सहयोग समझौते हुए हैं, जिनमें 2 ट्रिलियन जापानी येन (करीब 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का निवेश प्रस्तावित है।

उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों की साझेदारी केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टार्टअप, एमएसएमई और निजी कंपनियां भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

भारत बना जापानी कंपनियों का अहम निवेश केंद्र

ताकाइची ने कहा कि बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां भारत को अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में विस्तार के लिए रणनीतिक केंद्र के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) के तहत दोनों देश वैश्विक दक्षिण के देशों में भी विकास सहयोग बढ़ाएंगे।

द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी

विदेश मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया।

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की टोक्यो यात्रा के दौरान जापान ने अगले दस वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता भी जताई थी।

75वीं वर्षगांठ से पहले मजबूत होंगे संबंध

भारत और जापान वर्ष 2027 में राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे। इससे पहले दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई है।

दोनों देशों के बीच वर्तमान में 70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से विदेश, रक्षा, आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर नियमित उच्चस्तरीय वार्ता होती है।

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