भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है अरबों डॉलर का बूस्टर
नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता और निवेश के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया फैसलों से देश में विदेशी निवेश का प्रवाह तेज होने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि इससे न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि रुपये को भी नया सहारा मिलेगा।
दरअसल, दुनिया भर के निवेशक ऐसे देशों की तलाश में रहते हैं जहां निवेश पर बेहतर रिटर्न मिले और टैक्स का बोझ कम हो। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के लिए सरकारी बॉन्ड बाजार को और आकर्षक बना दिया है।
नई व्यवस्था के तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) पर बड़ी कर राहत दी गई है। पहले इन निवेशकों को ब्याज आय पर 20 प्रतिशत तक टैक्स और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत कर देना पड़ता था। अब कर संबंधी रियायतों से उनका वास्तविक लाभ बढ़ेगा और भारत में निवेश करना अधिक फायदेमंद बन जाएगा।
इसके साथ ही RBI ने भी विदेशी निवेश के रास्ते आसान कर दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के दायरे का विस्तार करते हुए 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाले नए सरकारी बॉन्ड को इसमें शामिल कर लिया है। इससे विदेशी निवेशक बिना किसी निवेश सीमा के इन बॉन्ड में पैसा लगा सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन कदमों का असर आने वाले महीनों में भारतीय डेट मार्केट में दिखाई दे सकता है। मार्च 2025 में भारत के डेट मार्केट में आए 4.3 अरब डॉलर के विदेशी निवेश में से 3.3 अरब डॉलर FAR के माध्यम से आए थे। ऐसे में नए प्रोत्साहनों से विदेशी निवेश का प्रवाह और तेज हो सकता है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि भारत में डॉलर का प्रवाह बढ़ता है तो विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा, रुपये पर दबाव कम होगा और विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाना आसान हो जाएगा। यही वजह है कि सरकार और RBI के इन फैसलों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

