तेहरान। मध्य-पूर्व में युद्धविराम के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। शांति वार्ता की कोशिशों के बीच ईरान ने एक बार फिर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत का बदला जरूर लिया जाएगा। इस बयान के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं।
खामेनेई के हत्यारों को नहीं छोड़ेंगे
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाकर जोलकद्र के हस्ताक्षर वाला एक संदेश सामने आया है। इसमें कहा गया है कि:
“अयातुल्लाह अली खामेनेई के खून का बदला उनके हत्यारों से निश्चित रूप से लिया जाएगा।”
इस बयान को ईरान की अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है।
क्या हुआ था 28 फरवरी 2026 को?
ईरान के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई थी। इस हमले में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और सरकारी अधिकारियों के मारे जाने का भी दावा किया गया था। अब 4 से 8 जुलाई के बीच खामेनेई के अंतिम संस्कार और राष्ट्रीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।
अमेरिका से बातचीत पर ईरान का साफ इनकार
हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर संपर्क की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन ईरान ने फिलहाल अमेरिका से सीधे वार्ता करने से इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने पहले हुए समझौतों (MoU) की शर्तों का पालन नहीं किया है। जब तक वादों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक किसी नई वार्ता का सवाल ही नहीं उठता।
ईरान ने साफ किया है कि जब तक लेबनान से इजरायली सेना की वापसी नहीं होती, तब तक वह अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं करेगा। इसी कारण कतर की राजधानी दोहा में प्रस्तावित अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों की बैठक भी नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेयर्ड कुशनर दोहा में मौजूद हैं। हालांकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात करने से इनकार कर दिया।
ट्रंप का दावा- बातचीत सही दिशा में
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि ईरान के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बरकरार है।

