तेहरान/वॉशिंग्टन : मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को ईरान ने जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि जॉर्डन में तैनात अमेरिकी THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है और अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कुवैत में अमेरिकी ड्रोन बेस भी बना निशाना
IRGC के मुताबिक, जॉर्डन के अलावा कुवैत स्थित अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन ऑपरेशन बेस पर भी मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। ईरान का दावा है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था।
अमेरिका ने लगातार 12वीं रात की एयरस्ट्राइक
ईरानी हमलों से पहले अमेरिका ने बुधवार देर रात ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में इराक सीमा के पास स्थित शलमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग पर हवाई हमला किया। ईरान के खुजेस्तान प्रांत के अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य के घायल होने की भी खबर है।
लगातार हो रहे जवाबी हमलों के कारण पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है, लेकिन फिलहाल हालात सामान्य होते नजर नहीं आ रहे हैं।

