नई दिल्ली: भारत और जापान की दोस्ती अब मिसाइलों तक पहुंच गई है। जापान अपनी सबसे खतरनाक लंबी दूरी की मिसाइलों और हमलावर ड्रोन की फायरिंग प्रैक्टिस के लिए भारत की मदद लेना चाहता है। बताया जा रहा है कि जापान के पास टेस्टिंग के लिए इतनी बड़ी जगह नहीं है, इसलिए अब उसकी नजर भारत के विशाल मिलिट्री रेंज पर है।
इस घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है। हालांकि, अभी भारत में जापानी मिसाइलों की फायरिंग या परीक्षण को लेकर कोई अंतिम समझौता घोषित नहीं हुआ है।
भारत को ही क्यों चुन रहा है जापान?
जापान के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह लंबी दूरी के हथियारों का सुरक्षित परीक्षण करना है। जापान का क्षेत्रफल सीमित है और वहां कई इलाकों में आबादी काफी घनी है। ऐसे में लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का पूरी क्षमता के साथ परीक्षण करना आसान नहीं है।
भारत के पास इसके लिए बड़े सैन्य परीक्षण क्षेत्र और समुद्र में फायरिंग के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। ओडिशा के चांदीपुर जैसे परीक्षण केंद्र भारत की मिसाइल परीक्षण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यहां से बंगाल की खाड़ी की ओर मिसाइल परीक्षण किए जाते हैं।
टाइप-25 मिसाइल पर क्यों है खास ध्यान?
जापान की टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल इस योजना का एक प्रमुख हिस्सा मानी जा रही है। यह समुद्र में मौजूद दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए विकसित की गई है। इसकी अनुमानित मारक दूरी करीब 1,000 किलोमीटर बताई जाती है।
इतनी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल के लिए केवल हथियार तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। सैनिकों को इसे तैनात करने, लॉन्च करने और वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग भी देनी होती है। जापान भारत में ऐसी ट्रेनिंग की संभावनाएं तलाश रहा है। हालांकि, अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि भारत में टाइप-25 मिसाइल का ही परीक्षण किया जाएगा या किसी दूसरे हथियार का इस्तेमाल होगा।
छोटे हमलावर ड्रोन भी योजना में शामिल
जापान अपने छोटे हमलावर ड्रोन की भी ट्रेनिंग भारत में करना चाहता है। आजकल की जंग में ड्रोन ही असली गेम-चेंजर हैं। इनसे दुश्मन पर नजर भी रखी जाती है, जानकारी भी मिलती है और मौका मिलते ही सीधा अटैक भी हो जाता है।असल में जापान के लिए अपने देश में ऐसी ट्रेनिंग करना आसान नहीं है।
वहाँ रेडियो फ्रीक्वेंसी का इश्यू है, सेफ्टी का टेंशन है और इतनी बड़ी खुली जगह भी नहीं मिलती।इसीलिए वो अब विदेश में जगह ढूंढ रहा है। अगर भारत में उसे ट्रेनिंग ग्राउंड मिल गया तो उसकी ये सारी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।
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भारत-जापान संबंधों के लिए क्या है इसका मतलब?
भारत और जापान की दोस्ती कोई नई नहीं है, खासकर डिफेंस में दोनों काफी क्लोज हैं। दोनों का एक ही मकसद है हिंद-प्रशांत में शांति बनाए रखना। और अभी सीन भी ऐसा ही है, चीन चारों तरफ अपनी मिलिट्री पावर दिखा रहा है, उधर उत्तर कोरिया आए दिन मिसाइलें दाग रहा है।
ऐसे में जापान के लिए अपनी सेना को मजबूत करना बहुत जरूरी हो गया है। तो अगर ये ट्रेनिंग वाला जुगाड़ बैठ गया तो जापान को भारत के बड़े-बड़े फायरिंग ग्राउंड मिल जाएंगे और भारत को भी जापान के साथ डिफेंस में अपनी दोस्ती को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का मौका मिल जाएगा।
फिलहाल सब कुछ बातचीत के लेवल पर है। लोकेशन देखी जा रही है, प्लान समझा जा रहा है। ट्रेनिंग कहां होगी, कब होगी, कौन सी मिसाइलें आएंगी – इस पर फाइनल मुहर लगनी बाकी है। पर अगर बात बन गई तो समझो भारत-जापान की रक्षा दोस्ती में ये सबसे बड़ा धमाका होगा।

